आदिवासी संस्कृति और एक विकसित संस्कृति के बीच का अंतर इन संस्कृतियों का प्रकृति के साथ सम्बन्ध है। एक विकसित संस्कृति प्रकृति के साथ सूक्ष्म से सूक्ष्मतर स्तर पर जुड़ती जाती है जबकि एक आदिवासी संस्कृति का प्रकृति से जुड़ाव काफी स्थूल होता है। प्रकृति और संस्कृति का यह सम्बन्ध आदिवासी संस्कृति में जड़वत होता है जबकि एक विकसित संस्कृति में यह सम्वन्ध बहुत ही गतिशील होता है।
अब यदि एक विकसित संस्कृति की बराबरी करनी हो तो आदिवासी समाज को यह कहने के बजाय की "हमारा शोषण हुवा है-हमारा शोषण हुवा है" अपनी और प्रकृति के साथ के सम्बन्धो की समीक्षा करनी चाहिए और उस जड़ता को तोड़ना चाहिए जिसके कारण वह आज तक वही रह गए जहां से उन्होंने और उस विकसित संस्कृति ने प्रारम्भ किया था।
इस जड़ता को तोड़ दें!
विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं!!
आदिवासी संस्कृति और विकसित संस्कृति का बाइनरी क्रिएट करने के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ लेकिन सच इस बाइनरी के माध्ययम से भी देखा जाना चाहिए।
अब यदि एक विकसित संस्कृति की बराबरी करनी हो तो आदिवासी समाज को यह कहने के बजाय की "हमारा शोषण हुवा है-हमारा शोषण हुवा है" अपनी और प्रकृति के साथ के सम्बन्धो की समीक्षा करनी चाहिए और उस जड़ता को तोड़ना चाहिए जिसके कारण वह आज तक वही रह गए जहां से उन्होंने और उस विकसित संस्कृति ने प्रारम्भ किया था।
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