भौतिकी के नियम क्या स्पेस-टाईम में रहते हैं या इनकी सत्ता देश-काल से परे है? आक्षेप करते हुए कहा जा सकता है कि भौतिकी के नियमो को उक्त शब्दावली के साथ सम्वन्धित कर एक अनावश्यक तत्वमीमांसिय प्रश्न खड़ा किया जा रहा है और इसका सामान्य ज्ञान पर आधिरित उत्तर है कि यह ब्रह्मांड के साथ अस्तित्वमान है बल्कि ये ब्रह्मांड के देश-कालातीत वह घटक है जो यह निर्धारित करते हैं कि ब्रह्मांड में ऊर्जा द्र्व्यमान आदि कैसा व्यवहार करेंगे।
इन्हें देश-कालातीत इसलिए कहा जा रहा है कि हमारी भौतिकी की आधुनिक समझ के अनुसार देश-काल स्वयम ही निरपेक्ष नही हैं किंतु भौतिकी के नियम की सापेक्षता विषयक अभी तक सम्भवतः कोई सिद्धान्त नही है हाँ स्ट्रिंग थ्योरी के मेगावर्स में ब्रह्मांड के अलग अलग हिस्सों में भौतिकी के अलग अलग नियम हो सकते हैं या मल्टीवर्स में विभिन्न ब्रह्मांडीय बुलबुलों में अलग अलग ब्रह्मांड के बुलबुलों में हो सकता है कि भौतिकी के अलग अलग नियम हों। मल्टीवर्स या मेगावर्स में भैतिकी के अलग अलग नियम की यह कल्पना सही भी हो सकती है और नही भी क्योकि अभी हमारे पास इसे सही सिद्ध करने या गलत प्रमाणित करने का कोई साधन नही है। अतः
हम अपने ब्रह्मांड पर ध्यान केंद्रित करते है और अपने इस ब्रह्मांड के सन्दर्भ में ऊपर के प्रश्न की भाषा में थोड़ा सुधार करते हुए यह तो पूछा ही जा सकता है कि भौतिकी के नियम इस ब्रह्मांड से किस प्रकार सम्बंधित हैं?
कहा जा सकता है कि भौतिकी के नियम ब्रह्मांड से उसी प्रकार सम्बंधित है ज्यों एक वाशिंग मशीन, मोटर या कोई भी यंत्र उन नियमो से सम्बंधित हैं लेकिन यह जवाब ठीक नही है क्योंकि एक वाशिंग मशीन, मोटर या यंत्रों से पूर्व भौतिकी के नियम हैं और इन नियमो के आधार पर ये उपकरण काम करते है और बनते हैं।
इन्हें देश-कालातीत इसलिए कहा जा रहा है कि हमारी भौतिकी की आधुनिक समझ के अनुसार देश-काल स्वयम ही निरपेक्ष नही हैं किंतु भौतिकी के नियम की सापेक्षता विषयक अभी तक सम्भवतः कोई सिद्धान्त नही है हाँ स्ट्रिंग थ्योरी के मेगावर्स में ब्रह्मांड के अलग अलग हिस्सों में भौतिकी के अलग अलग नियम हो सकते हैं या मल्टीवर्स में विभिन्न ब्रह्मांडीय बुलबुलों में अलग अलग ब्रह्मांड के बुलबुलों में हो सकता है कि भौतिकी के अलग अलग नियम हों। मल्टीवर्स या मेगावर्स में भैतिकी के अलग अलग नियम की यह कल्पना सही भी हो सकती है और नही भी क्योकि अभी हमारे पास इसे सही सिद्ध करने या गलत प्रमाणित करने का कोई साधन नही है। अतः
हम अपने ब्रह्मांड पर ध्यान केंद्रित करते है और अपने इस ब्रह्मांड के सन्दर्भ में ऊपर के प्रश्न की भाषा में थोड़ा सुधार करते हुए यह तो पूछा ही जा सकता है कि भौतिकी के नियम इस ब्रह्मांड से किस प्रकार सम्बंधित हैं?
कहा जा सकता है कि भौतिकी के नियम ब्रह्मांड से उसी प्रकार सम्बंधित है ज्यों एक वाशिंग मशीन, मोटर या कोई भी यंत्र उन नियमो से सम्बंधित हैं लेकिन यह जवाब ठीक नही है क्योंकि एक वाशिंग मशीन, मोटर या यंत्रों से पूर्व भौतिकी के नियम हैं और इन नियमो के आधार पर ये उपकरण काम करते है और बनते हैं।
No comments:
Post a Comment