एक फोटॉन पानी पर गिरता है अब वह परावर्तित होगा या अपवर्तित यह कोई नही जानता, हमारी भौतिकी के नियम कहते है कि 80℅ चांस है कि वह अपवर्तित हो जाय लेकिन निश्चित तौर पर क्या होगा यह पता नही है क्योंकि शायद जगत ऐसा ही हो: पासो का खेल या हमारी चेतना हमारी बुद्धि में वह ऐसे ही समझ मे आते हों।
9000000000 डॉलर और हज़ारों वैज्ञानिकों ने सर्न में कई वर्ष प्रतीक्षा किया तब जाकर 2012 में हमे गॉड पार्टिकल्स या हिग्स बोसोन मिले क्योंकि मूलभूत स्तर पर सब कुछ समान होने पर एक प्रयोग समान निष्कर्ष नही देते। उस स्तर पर समान परिस्थिति में दुहराया गया समान प्रयोग अलग अलग निष्कर्ष देता है लेकिन ऐसा क्यों होता है हम नही जानते; शायद जगत ऐसा ही है।
बिग बैंग के बाद ब्रह्मांड में ऊर्जा भरी पड़ी थी। यह ऊर्जा पार्टीकल और एन्टी पार्टीकल में टूटती या पुनः ये पार्टीकल और एन्टी पार्टीकल कण आपस मे अन्हाइलेट होकर पुनः ऊर्जा बनते थे लेकिन कुछ रहस्मय घटा प्रत्येक एक अरब पार्टीकल- एन्टी पार्टीकल पेयर पर एक एक्स्ट्रा पार्टीकल बना और इस प्रकार के कई पार्टिकल्स से हमारी दुनिया, हमारा ब्रह्मांड बना।
प्रत्येक एक अरब पार्टीकल-अन्तिपार्टिकल युग्म पर यह एक एक्स्ट्रा पार्टीकल कैसे बना यह भी हम नही जानते।
9000000000 डॉलर और हज़ारों वैज्ञानिकों ने सर्न में कई वर्ष प्रतीक्षा किया तब जाकर 2012 में हमे गॉड पार्टिकल्स या हिग्स बोसोन मिले क्योंकि मूलभूत स्तर पर सब कुछ समान होने पर एक प्रयोग समान निष्कर्ष नही देते। उस स्तर पर समान परिस्थिति में दुहराया गया समान प्रयोग अलग अलग निष्कर्ष देता है लेकिन ऐसा क्यों होता है हम नही जानते; शायद जगत ऐसा ही है।
बिग बैंग के बाद ब्रह्मांड में ऊर्जा भरी पड़ी थी। यह ऊर्जा पार्टीकल और एन्टी पार्टीकल में टूटती या पुनः ये पार्टीकल और एन्टी पार्टीकल कण आपस मे अन्हाइलेट होकर पुनः ऊर्जा बनते थे लेकिन कुछ रहस्मय घटा प्रत्येक एक अरब पार्टीकल- एन्टी पार्टीकल पेयर पर एक एक्स्ट्रा पार्टीकल बना और इस प्रकार के कई पार्टिकल्स से हमारी दुनिया, हमारा ब्रह्मांड बना।
प्रत्येक एक अरब पार्टीकल-अन्तिपार्टिकल युग्म पर यह एक एक्स्ट्रा पार्टीकल कैसे बना यह भी हम नही जानते।
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