आइंस्टीन की स्पेशल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी ने स्पेश और समय की पुरानी समझ बदल दी। अब स्पेश और समय अलग अलग न होकर स्पेश-समय के रूप में समझे जाने लगे अतः सही शब्द दिक-काल है न कि दिक और काल।
भौतिकी के सिद्धान्त हमे बताते हैं कि बिग बैंग के समय सिंगुलैरिटी थी। सिंगुलैरिटी में दिक-काल का कोई अर्थ नही रह जाता। हमारी भौतिकी उस सिंगुलैरिटी के साथ डील नही कर सकती।
ब्रह्मांड में दिक-काल है, या यूं कहें कि ब्रह्मांड चतुर्विमिय है: तीन विमा दिक के और चौथा विमा काल हालांकि नई नई कुछ थ्योरियों में ब्रह्मांड के 10 विमा तक होने की बात की जाती है।
आपके प्रश्न का सीधा उत्तर तो यही है कि ब्रह्मांड बनने के बाद दिक-काल बने लेकिन फिर आप पूछेंगे की वह बिग बैंग कहा हुवा या ब्रह्मांड कहा फैल रहा है या जब समय नही था तो क्या था?
इस प्रश्न को समझने के लिए हमे अपने कॉन्सेप्ट में सुधार करना पड़ता है और उच्च गणित की आवश्यकता पड़ती है।
एम उदाहरण देता हूं : मेरी पुत्री देखती है कि पड़ोस वाली आंटी आती हैं और अपने घर जाती हैं।एक दिन वह सुनती है कि लाइट चली गई। वह पूछती है: पापा लाइट का घर कहा है?
अब उसे कैसे समझाऊं की लाईट उन अर्थों में नही जाती जिन अर्थों में आंटी आती या जाती हैं।
भौतिकी के सिद्धान्त हमे बताते हैं कि बिग बैंग के समय सिंगुलैरिटी थी। सिंगुलैरिटी में दिक-काल का कोई अर्थ नही रह जाता। हमारी भौतिकी उस सिंगुलैरिटी के साथ डील नही कर सकती।
ब्रह्मांड में दिक-काल है, या यूं कहें कि ब्रह्मांड चतुर्विमिय है: तीन विमा दिक के और चौथा विमा काल हालांकि नई नई कुछ थ्योरियों में ब्रह्मांड के 10 विमा तक होने की बात की जाती है।
आपके प्रश्न का सीधा उत्तर तो यही है कि ब्रह्मांड बनने के बाद दिक-काल बने लेकिन फिर आप पूछेंगे की वह बिग बैंग कहा हुवा या ब्रह्मांड कहा फैल रहा है या जब समय नही था तो क्या था?
इस प्रश्न को समझने के लिए हमे अपने कॉन्सेप्ट में सुधार करना पड़ता है और उच्च गणित की आवश्यकता पड़ती है।
एम उदाहरण देता हूं : मेरी पुत्री देखती है कि पड़ोस वाली आंटी आती हैं और अपने घर जाती हैं।एक दिन वह सुनती है कि लाइट चली गई। वह पूछती है: पापा लाइट का घर कहा है?
अब उसे कैसे समझाऊं की लाईट उन अर्थों में नही जाती जिन अर्थों में आंटी आती या जाती हैं।
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