चैत्र मास है।
सूर्य मीन राशि में है। सूर्य के मीन राशि में प्रवेश की परिघटना के साथ ही नए सम्वत्सर का प्रारम्भ हुवा।
भगवान का पहला अवतार मत्स्य का है और सूर्य जब मीन राशि में प्रवेश करते है तो नए वर्ष एवम सम्वत्सर का प्रारम्भ होता है:
यह केवल संयोग मात्र है कि कोई गहरी बात छुपी है इसमें?
पुनः नवरात्र चल रही है। हम इसे नवदिवस भी तो कह सकते थे लेकिन क्या कन्या राशि पूरी रात्रि इन दिनों रात्रि में ही नही उदित होतीं?
क्या हर कन्या में माई का रूप हम नही देखते?
कन्या राशि से ठीक १८० अंश का कोण मीन राशि बनाती है तो क्या माई सूर्य का मीन में प्रवेश (अवतरण) नही देख रही हैं?
यदि कल्पना शास्त्रों से अनुशाषित न हो और उस पर गुरु की कृपा न हो तो वह अयथार्य को यथार्थ और यथार्थ का स्वरूप विकृत करके प्रस्तुत कर देती है।
दुर्भाग्य से मेरे पास न तो शास्त्र सम्मत बुद्धि है और न हि गुरु कृपा अतः यदि मेरी कल्पना यथार्थ का विकृत रूप प्रस्तुत कर रही है तो उसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ लेकिन मुझे कन्या सूर्य और मीन के सम्बंध के देखकर यह लग रहा है कि #माई मत्स्यावतार देख रही हैं!
सूर्य मीन राशि में है। सूर्य के मीन राशि में प्रवेश की परिघटना के साथ ही नए सम्वत्सर का प्रारम्भ हुवा।
भगवान का पहला अवतार मत्स्य का है और सूर्य जब मीन राशि में प्रवेश करते है तो नए वर्ष एवम सम्वत्सर का प्रारम्भ होता है:
यह केवल संयोग मात्र है कि कोई गहरी बात छुपी है इसमें?
पुनः नवरात्र चल रही है। हम इसे नवदिवस भी तो कह सकते थे लेकिन क्या कन्या राशि पूरी रात्रि इन दिनों रात्रि में ही नही उदित होतीं?
क्या हर कन्या में माई का रूप हम नही देखते?
कन्या राशि से ठीक १८० अंश का कोण मीन राशि बनाती है तो क्या माई सूर्य का मीन में प्रवेश (अवतरण) नही देख रही हैं?
यदि कल्पना शास्त्रों से अनुशाषित न हो और उस पर गुरु की कृपा न हो तो वह अयथार्य को यथार्थ और यथार्थ का स्वरूप विकृत करके प्रस्तुत कर देती है।
दुर्भाग्य से मेरे पास न तो शास्त्र सम्मत बुद्धि है और न हि गुरु कृपा अतः यदि मेरी कल्पना यथार्थ का विकृत रूप प्रस्तुत कर रही है तो उसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ लेकिन मुझे कन्या सूर्य और मीन के सम्बंध के देखकर यह लग रहा है कि #माई मत्स्यावतार देख रही हैं!
No comments:
Post a Comment