Wednesday, December 4, 2019

धर्म, विज्ञान और दर्शन के मध्य एक लघु संवाद

विज्ञान: निरपेक्ष सत्य कुछ नही होता, हम किसी के बारे में आखरी बात कह ही नही सकते।

धर्म: निरपेक्ष भी होता है और आखरी बात भी होती है, विज्ञान वहाँ पहुँच ही नही सकता।

दर्शन: निरपेक्ष सत्य कुछ नही होता यह कहकर वैज्ञानिक स्वयम एक निरपेक्ष सत्य के बारे में आखरी बात कहने का प्रयास कर रहे हैं।

विज्ञान: हमारा काम अपनी किसी बात को सत्य सिद्ध करना नही है, हम फॉलसफाई करते हैं और यही विज्ञान है।

धर्म: हमारा काम अपनी बात को सत्य सिद्ध करना और बाकी बातों को फॉलसिफाई करना है।

दर्शन: ये सत्य सिद्ध करने और फॉलसिफाई करने का अर्थ क्या है?

विज्ञान: जो प्रेडिक्टिव हो और जिसके आधार पर कम से कम आरबिट्र्री चीजें मिले वह उस समय का सत्य है। आरबिट्र्री तत्व का मिलना फॉलसिफिकेशन है और फिर एक नया सत्य ढूंढना पड़ता है, सत्य में संशोधन करना पड़ता है।

धर्म: अंतिम सत्य तो एक ही है, वह ईश्वर, उसके रिस्पेक्ट में बाकी सारी चीजें फॉल्स हैं इसिलए विज्ञान को बार बार नया सत्य ढूंढना पड़ता है। हमारे ग्रन्थ.......

दर्शन: धर्म अब चुप रहो अब विज्ञान को बात करने दो।

धर्म: दर्शन तुम अभागे हो, तुम्हे मुक्ति नही मिलेगी, तुम विज्ञान के चकक्कर में फंस चुके हो।

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