Wednesday, December 4, 2019

यूनिफाइड यूनिफाइड सिद्धान्त


कोई भी यूनिफाइड सिद्धान्त, चाहे वह ब्रह्म हो, परमसत्ता हो या बहुप्रतीक्षित भौतिकी की थ्योरी ऑफ एवरीथिंग, यदि वह मानव की पीड़ा का इसी व्यवहारिक दुनिया मे निवारण नही करती तो वह एकीकृत सिद्धान्त कैसे है?
पीड़ा, मनुष्य को व्यवहार से बाँधे भी रखती है और मनुष्य से परमार्थ के रूप में पलायन की अधिभौतिकी भी रचवाती है।
सत चित आनंद का नही पता, सत और चित का भी नही मालूम लेकिन वेदना है, यह निर्विवाद है।
परमार्थ का बोध में पीड़ा का निवारण हो न हो पीड़ा से पलायन के प्रयास में परमार्थ अवश्य रचा जाता है।

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