Tuesday, December 31, 2019

परशुराम

मेरा परमपिता
सर्वशक्तिमान नही है,
बोध!
आदमी बनने की कीमत!
ना, पतित देवदूत नही हूँ,
शैतान या इबलीस भी नही,
और इडिपस ग्रन्थि तो कतई नही
-माँ तो केवल उस क्षण होती है,
जब पैदा करती है मुझे,
असभ्य आवाजो के साथ,
ततपूर्व और ततपश्च वह तो विभ्रम है,
किसी पागल की!
अतिशय पुरुषवाद?
-सारा भार पिता पर है,
जो बधिया किया हुआ है,
एक बैल सा,
मैने जिब्रील से कहा!

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