जगत में मात्र क्वांटिफिकेबल सत्ताएं ही नही है इसमें क्वालिटेटिव सत्ता भी है। लाल से सम्बंधित डेविड चालमर का चेतना का हार्ड प्रॉब्लम, क्वालिया की समस्या जो भी हो लेकिन लाल रंग को क्वांटिफाई किया जा सकता है। इसे इसके वेवलेंथ और फ्रीक्वेंसी कोरिलेट्स में संख्यात्मक रूप से व्यक्त किया जा सकता है। अभी भी बहुत सी घटनाएं, सत्ताएं, चीजें हैं जिनका क्वान्टिफिकेशन नही किया जा सकता है। सम्भवतः इनमे से कुछ चीजों का भविष्य में कोई कोरिलेट्स ढूंढ लिया जाय जिसको इन कोरिलेट्स के गणितीय मान से व्यक्त किया जा सके क्योंकि विज्ञान के विकास का आशय इस क्वान्टिफिकेशन के स्कोप का विस्तार करना है; किसने कल्पना की थी कि लालिमा को गणित में अभिव्यक्त किया जा सकता है! सम्भवतः कुछ चीजें ऐसी भी हों जिनका कभी क्वान्टिफिकेशन सम्भव ही न हो लेकिन तब यह भी नही कहा जा सकता कि उनका अस्तित्व नही है।
"वह बहुत लंबा है" इसमें "बहुत" को क्वांटिफाई नही किया जा सकता क्योंकि "बहुत" का कोई मानक नही है हालांकि क्वान्टिफिकेशन के पश्चात "लम्बा" का भी कोई अर्थ नही रह जाता: चीजो की लंबाई होती है जिनको इकाइयों में अभिव्यक्त किया जाता है।
यहाँ यह कहा जा सकता है कि "बहुत" "लंबा" आदि शब्द विषयनिष्ठ कंस्ट्रक्ट हैं और प्रकृति के परिप्रेक्ष्य में "लम्बा" प्रकृति का कोई अपना गुणधर्म नही है।
"वह लम्बा है" निश्चित रूप से यह एक क्वालिटेटिव प्रकथन है और "उसकी लम्बाई 180 सेंटी मीटर है" एक क्वांटिटेटिव। प्रश्न है कि हम कैसे मान लें कि 180 प्रेक्षक निरपेक्ष एक वस्तुनिष्ठ सत्ता है और यह "लम्बा" की भांति ही दस बीस की बजाय सभी मानवो का सब्जेक्टिव कंस्ट्रक्ट नही है जिसका तार्किक निष्कर्ष यह होगा की गणित हमारे अंदर है वाह्य जगत में नही।
"वह बहुत लंबा है" इसमें "बहुत" को क्वांटिफाई नही किया जा सकता क्योंकि "बहुत" का कोई मानक नही है हालांकि क्वान्टिफिकेशन के पश्चात "लम्बा" का भी कोई अर्थ नही रह जाता: चीजो की लंबाई होती है जिनको इकाइयों में अभिव्यक्त किया जाता है।
यहाँ यह कहा जा सकता है कि "बहुत" "लंबा" आदि शब्द विषयनिष्ठ कंस्ट्रक्ट हैं और प्रकृति के परिप्रेक्ष्य में "लम्बा" प्रकृति का कोई अपना गुणधर्म नही है।
"वह लम्बा है" निश्चित रूप से यह एक क्वालिटेटिव प्रकथन है और "उसकी लम्बाई 180 सेंटी मीटर है" एक क्वांटिटेटिव। प्रश्न है कि हम कैसे मान लें कि 180 प्रेक्षक निरपेक्ष एक वस्तुनिष्ठ सत्ता है और यह "लम्बा" की भांति ही दस बीस की बजाय सभी मानवो का सब्जेक्टिव कंस्ट्रक्ट नही है जिसका तार्किक निष्कर्ष यह होगा की गणित हमारे अंदर है वाह्य जगत में नही।
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