भविष्य का समय है, वो ब्रह्मांड के इतने रहस्य जान चुके हैं कि अब अमेरिका में ग्यारहवीं के बच्चे प्रोजेक्ट में अपना अपना ब्रह्मांड लेकर जाते हैं: छोटे छोटे ब्रह्मांड। हां इनको जीवन पनपाने वाली सूत्र अभी नही दी गई है। वह बड़े बड़े वैज्ञानिक अपने अपने ब्रह्मांड में बनाते हैं तथा उस ब्रह्मांड को फिर इस ब्रहांड के समानांतर लांच पैड से लांच कर दिया जाता है।
हम भारतीय उस समय उस तकनीक को अभी हासिल नही कर पाए हैं, कुछ भारतीय वैज्ञानिक हालांकि स्वदेशी तकनीक से ब्रह्मांड बनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन तभी एक बाबा प्रकट होते हैं और कहते हैं कि हमारे पूर्वज तो लैब की जगह घर मे ब्रह्मांड पैदा कर देते थे और इससे सम्वन्धित वह दस्तावेज भी पेश करते हैं जिसमे राम खेलावन पांड़े को ब्रह्मांड का पिता लिखा गया है।
दरअसल राम खेलावन पांड़े ने अपने लड़के का नाम ही ब्रह्मांड और लड़की का नाम ब्रह्माण्डी रख दिया था।
कुछ भारतीय तो गर्व से कहते फिर रहे हैं कि हमारे पूर्वज राम खेलावन पांड़े ने तो ब्रह्मांड के साथ ब्रह्माण्डी भी बना दिया था। ये वैज्ञानिक हमारे रामखेलावन का लंगोटा चुरा कर ले गए और उनके असली लंगोटे की जगह यहां भारत मे नकली लंगोटा छोड़ गए इसीलिए हम पीछे रह गए लेकिन आज भी वो ब्रह्माण्डी नही बना सके।
क्यो न सत्य हो, हमने तो खिड़की के धूल से अणु की व्याख्या कर दी थी और हमारे असली वेद तो अंग्रेज ले गए।
तो बोलो भक्त वत्सल भगवान की जय, जै!
हम भारतीय उस समय उस तकनीक को अभी हासिल नही कर पाए हैं, कुछ भारतीय वैज्ञानिक हालांकि स्वदेशी तकनीक से ब्रह्मांड बनाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन तभी एक बाबा प्रकट होते हैं और कहते हैं कि हमारे पूर्वज तो लैब की जगह घर मे ब्रह्मांड पैदा कर देते थे और इससे सम्वन्धित वह दस्तावेज भी पेश करते हैं जिसमे राम खेलावन पांड़े को ब्रह्मांड का पिता लिखा गया है।
दरअसल राम खेलावन पांड़े ने अपने लड़के का नाम ही ब्रह्मांड और लड़की का नाम ब्रह्माण्डी रख दिया था।
कुछ भारतीय तो गर्व से कहते फिर रहे हैं कि हमारे पूर्वज राम खेलावन पांड़े ने तो ब्रह्मांड के साथ ब्रह्माण्डी भी बना दिया था। ये वैज्ञानिक हमारे रामखेलावन का लंगोटा चुरा कर ले गए और उनके असली लंगोटे की जगह यहां भारत मे नकली लंगोटा छोड़ गए इसीलिए हम पीछे रह गए लेकिन आज भी वो ब्रह्माण्डी नही बना सके।
क्यो न सत्य हो, हमने तो खिड़की के धूल से अणु की व्याख्या कर दी थी और हमारे असली वेद तो अंग्रेज ले गए।
तो बोलो भक्त वत्सल भगवान की जय, जै!
No comments:
Post a Comment