Wednesday, December 4, 2019

सागर भी मुक्त नही है उस बून्द की तरह

जलधि में जल की विशाल राशि है। वह स्वयम भी जल की विशाल राशि ही है क्योकि यहाँ "में" और है का भेद खत्म हो जाता है। जलधि, जलनिधि, समुद्र या सागर एक दृष्टि में जल की एक बहुत बड़ी बून्द ही है। बिल्कुल उस छोटी बून्द की तरह जो हमारी उंगलियों पर भी रह सकती है जब हम अपनी उंगली से इस विराट जलराशि को स्पर्श करते हैं। इस छोटी बून्द और उस विराट में पूर्ण कौन है?
दोनों ही पूर्ण हैं: यह छोटी बून्द भी और वह महासागर भी। वह जलनिधि जल की छोटी छोटी बूंदों से निर्मित होने के बावजूद, ये उस विशाल बून्द के अंश होने के बावजूद भी अपने मे पूर्ण है और ये छोटी बूंदे उस विशाल बून्द के टुकड़ों में बट जाने के बाद भी।

महासागर की उस बड़ी बून्द को छोटी छोटी बूंदे बनना पड़ता है यह उसकी मुक्ति है और फिर इन छोटी बूंदों का महासागर बनना इन छोटी बूंदों की मुक्ति।
मात्र यह ही बद्ध नही है, वह भी मुक्त नही है।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते।
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥

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