एक बद फैलसुफ की कलम से,
फलसफा, वह इल्म जो बातिनी ओ जाहिरी खुलक के राजो को जाहिर करने का दावा करती है। फलसफा के अपने कुछ सवालात हैं, मसलन, यह दुनिया किस शै से बनी है? यह दुनिया बनी ही क्यों है? हम यह सवालात करते ही क्यों है?
एक खूब फैलसुफ का दावा करने वाले इस गफलत में जीते हैं कि फलसफा के पास इन सवालों के जवाब मालूम हैं लेकिन दौर के अदिम से दौर ए कदीम तक यह सवाल जयों के त्यों हैं।
तब फिर क्या बद फलसफाई और क्या खूब फ्लसफाई!
फलसफा, वह इल्म जो बातिनी ओ जाहिरी खुलक के राजो को जाहिर करने का दावा करती है। फलसफा के अपने कुछ सवालात हैं, मसलन, यह दुनिया किस शै से बनी है? यह दुनिया बनी ही क्यों है? हम यह सवालात करते ही क्यों है?
एक खूब फैलसुफ का दावा करने वाले इस गफलत में जीते हैं कि फलसफा के पास इन सवालों के जवाब मालूम हैं लेकिन दौर के अदिम से दौर ए कदीम तक यह सवाल जयों के त्यों हैं।
तब फिर क्या बद फलसफाई और क्या खूब फ्लसफाई!
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