Wednesday, December 4, 2019

गणित के निष्कर्ष

गणित के निष्कर्ष निरपेक्ष होते हैं अर्थात 2+2 =4 हर काल और देश मे सत्य है जबकि आनुभविक विज्ञानों के निष्कर्ष सम्भाव्य होते हैं इसका कारण यह है कि गणित के प्राक्कथन "पुनरुक्तियाँ" होती हैं। (रसेल)
एक ऐसा प्राक्कथन बनाया जा सकता है जो हमेशा सत्य ही होगा यथा:

आज या तो तीन तारीख है या तीन तारीख नही है

यह कथन हमेशा सत्य होगी क्योंकि यदि आज तीन तारीख है तो भी यह कथन सत्य है और यदि आज तीन तारीख नही है तो भी यह कथन सत्य है।

और इसीलिए गणित के निष्कर्ष हमेशा सत्य होते हैं।

अब प्रश्न आता है कि क्या गणितिय ज्ञान हमारे ज्ञान के कॉर्पस में वृद्धि करता है: क्या यह जगत विषयक हमे कोई नवीन ज्ञान देता है तो इसका उत्तर होगा नही हालांकि एक गणितीय अभव्यक्ति में ऐसी कई चीजें इम्प्लाइड हो सकती हैं जिनको ढूंढने में दो चार जेनरेशन का समय लग जाए लेकिन इन ढूंढी गई चीजो को वह गणितीय अभव्यक्ति प्रेडिक्ट कर रही होती है और इस प्रकार यह जगत विषयक कोई नया ज्ञान नही होता। जगत विषयक किसी भी नवीन ज्ञान की स्थापना आनुभविक विज्ञान द्वारा ही होती है भले ही यह नवीन ज्ञान गणितीय रूप में सूत्रबद्ध हो।

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