Wednesday, December 4, 2019

ब्रह्मांड का पितृऋण?

ब्रह्मांड में चेतना का इमर्ज होना एक अद्भुत घटना है। कार्ल सेगन कहते हैं कि जो कुछ भी था, जो कुछ भी है और जो कुछ भी होगा वह कॉस्मॉस है।
अर्थात हम ज्ञाता हो जाने से ब्रह्मांड से बाहर नही हो जाते बल्कि हम भी ब्रह्मांड के हिस्से हैं।
अब यह उद्वेलित नही करता कि ब्रह्मांड का एक हिस्सा ब्रह्मांड ने ऐसा रचा जो ब्रह्मांड को जानने लगता है और जानने ही नही लगता बल्कि ब्रह्मांड में एक नए स्तर से पार्टिसिपेट करने लगता है।इस स्तर पर ब्रह्मांड में पार्टिसिपेट कोई नही करता: न कोई ग्रह, नक्षत्र, तारे, निहारिका या बैक्टेरिया, वायरस, वृक्ष, पशु कोई भी नही।
एक अल्टरनेट ब्रह्मांड में सम्भव है कि वह इंटेलिजेंट लाईफ को तो छोड़िए, लाइफ को ही नही इमर्ज होने देता। हमारे ब्रह्मांड ने हमे यह या तो मौका दिया है या यह हमारे ब्रह्मांड के अस्तित्व में आने की शर्तों में ही है।
क्या यह असम्भव है कि ब्रह्मांड ने हमे इसलिए रचा है कि हम ब्रह्मांड को रचे?
हमारे माता-पिता हमे जन्म देते हैं और हम अपने बच्चों को जन्म देते हैं लेकिन दरअसल जीन के स्तर पर हमारे माता पिता हमारे माध्ययम से स्वयम को जन्म देते हैं और हम अपने बच्चों के माध्ययम से स्वयम को। दृष्टि को थोड़ा और विस्तार दिया जाय तो हम अपनी सन्तति के माध्ययम से अपने पूर्वजो को जन्म दे रहे होते हैं।
हम ब्रह्मांड के बच्चे हैं, शायद ब्रह्मांड ने हमे इसलिए इंटेलिजेंस दिया है कि हम ब्रह्मांड को जन्म दें और अनुकूलन के बहाने ही सही इसलिए भी ब्रह्मांड अपने रहस्य हमे बताता है।

सम्भव है कि कल हम ब्रह्मांड को जन्म दे रहे हों और ब्रह्मांड ने हमे इसीलिए रचा हो।
वैसे अभी यह मात्र एक विज्ञान गल्प है।

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