Wednesday, December 4, 2019

बी एच यू का प्रयोग

नहाना एक सामान्य क्रिया है। कही भी नहाया जा सकता है लेकिन गङ्गा नहाना एक धार्मिक क्रिया है। इसके मुहावरे वाले अर्थ को दरकिनार करते हुए गङ्गा स्नान केवल गङ्गा में ही सम्भव है और गङ्गा में हिन्दू जनमानस की आस्था देखिए कि कई लोगो का तो जो गङ्गा से दूर रहते है, गङ्गा में एक बार डुबकी लगाना जीवन का एक स्वप्न होता है।

पढ़ाई-पढ़ाई-पढ़ाई ही तो है ---अरे भाई गङ्गा में नहाने और बाथरूम में नहाने का एक उद्देश्य नही है। बाथरूप में आप शरीर को साफ रखने के लिए नहाते है, गङ्गा में उनका नहाना निष्ठाधारित है।
आप उनको यह कहते हैं कि जब आपके लिए लक्ज़री बाथरूम की व्यवस्था कर ही दी तो गङ्गा नहाने जाने की कोई आवश्यकता नही है, आपकी मूर्खता है भले ही आपने हाइजीन स्टडी में पी एच डी लिया हो।
डॉक्टर फिरोज संस्कृत पढ़ाए इससे किसी को कोई आपत्ति नही है लेकिन पढ़ाई के उस दूसरे अर्थ की उपेक्षा करते हुए उस परम्परा से छेड़छाड़ अनुचित है: यह अर्थ जो यह एक अलग परम्परा से जन्मी है और परिवर्धित हुई है और उस परम्परा में गुरु होने की अहर्ता सम्बंधित विषय के अध्य्यापन का ज्ञान ही नही बल्कि साधनरूपी उस विषय से पूरे होने वाले साध्य में समर्पित निष्ठा है।

अपनी दृष्टि के अनुसार आप इस परम्परा को मानव का तर्केत्तर पक्ष या कठमुल्लापन कह सकते हैं लेकिन यदि आप इसे कठमुल्लापन भी मानते है तो इनसे छेड़छाड़ का अधिकार आपको कौन देता है?

No comments:

Post a Comment

डीहवार, चेरो और खरवार: एक भाषाई और ऐतिहासिक विश्लेषण

डीहवार, चेरो और खरवार: एक भाषाई और ऐतिहासिक विश्लेषण भूमिका: भारतीय समाज की विभिन्न जनजातियाँ न केवल अपने ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों में...