सन्निपात
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दो
हम बने ही ऐसे हैं कि प्रथम दृष्टया हमे लगता है कि हम सबके केंद्र में हैं। हम एक निर्जन स्थान पर हों तो हम उस वृत के जो हमारी आँखे देखती हैं उसके केंद्र में नज़र आते हैं। अपनी दृष्टि थोड़ी विस्तृत करें तो हमे हमारी पृथ्वी पूरे दृश्य आकाशगंगा के केंद्र में लगती है। अगर हम अपनी आकाशगंगा के परिप्रेक्ष्य से ब्रह्मांड को देखें तो फिर शेष दृश्य ब्रह्मांड के केंद्र में हमारी आकाश गंगा होती है।
हर जीव और जीवन के केंद्र में हमे अपना अस्तित्व और मानव जाति दिखती है जैसे यह सब हमारे लिए ही बना हो या हम सबसे महत्वपूर्ण, सबसे उच्च जीव हों लेकिन परिप्रेक्ष्य बदलिए और दृश्य बदल जाता है हालांकि परिप्रेक्ष्य बदलना बहुत हिम्मत का काम है क्योंकि यह हमारे अंदर एक भावात्मक तूफान खड़ा कर देता है। यह स्थिति बड़ी पीड़ादायी होती है और हम इससे बचना चाहते हैं इसीलिए हम अपने उस मिले, बने बनाए ककून में खुश रहते हैं।
अपनी अहमकेन्द्रित विष्मवस्था में खुश रहने में कोई दिक्कत नही है लेकिन किसी और को जो उस ककून को तोड़ कर बाहर निकलना चाहता है उसको संस्कृति, पूर्वज आदि की दुहाई देकर या कई बार उसके प्रति हिंसक होकर उसे रोकना बुद्धिमता और मानवीयता नही स्वार्थ है।चुकी उसके द्वारा उद्घाटित नया सत्य भी अंततः आपके अंदर वही पीड़ादायी भावात्मक तूफान ला सकता है अतः यह संस्कृति नही बल्कि छद्म रूप से आपके अपने उस ककून की रक्षा है।
परमसत, परमसत्ता आदि की जब हम बात करते हैं तो अचेतन रूप से हम एक गतिहीन, मानव केंद्रित जगत में विश्वास कर रहे होते हैं ज्यों मनुष्य जाति की कॉग्निटिव फेकल्टी और एस्थेटिक सेंस उस निरपेक्ष को जानने, उसके सौंदर्यबोध को विकसित है। निम्नतर जन्तुओ के कॉग्निशन की तुलना में हमारी यह फेकल्टी अवश्य विकसित है लेकिन आज से एक लाख वर्ष भविष्य में जो प्रजाति हमसे विकसित होगी उसकी तुलना में हमारी संज्ञानात्मकता, एस्थेटिक सेंस अत्यंत निम्न है; उनकी परमसत्ता कुछ और होगी क्योंकि परमसत्ता हमारे फ्रोन्टल लोब में रचा जाता है।
एक मित्र ने कहा कि आपके पूर्वज बंदर होंगे हमारे तो ऋषि थे। आज से एक दो लाख वर्ष भविष्य में स्वयम को प्रोजेक्ट करिए और देखिए हमसे विकसित कुछ लोग शर्म के मारे यह स्वीकार ही नही कर पा रहे हैं कि उनके पूर्वज मानव थे। उस समय "अरे आदमी" एक गाली है।
(किसी की भावना को ठेस पहचाना मेरा उद्देश्य नही लेकिन इस ककून में मेरा दम घुटता है)
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