Wednesday, December 4, 2019

पेट: पापी पेट, एक बित्ता पेट

पेट: पापी पेट, एक बित्ता पेट, कभी पीठ में धंसा हुआ पेट, कभी तोंद बनकर निकला हुवा पेट कभी सिक्स पैक्स में दीखता पेट!
पेट: जिसके बारे में आपने प्राणायाम की क्लास में कहा था कि छाती से साँस मत लो, पेट से साँस लो।
(मैं किसी छप्पन इंच की छाती की बात नही कर रहा)
पेट, जो खाली होता है तो दिमाग को पागल कर देता है,पेट, जब भरा हो तो उससे भी बड़ा पागल कर देता है।

पेट, जब भर न पाए तो मुफलिसी, दरिद्रता, गरीबी।
पेट जब भर जाए तो धर्म, संस्कृति की दुहाई।

हा-हा हा! हा-हा-हा!

पेट भर ठूंसने के बाद अर्धनिद्रा में बड़बड़ाना सा है तुम्हारी संस्कृति!

खाली पेट, जहाँ यदि बाइबिल पहुँच जाए तो मुख वोमीट कर देगा, पेट जहाँ, दास कैपिटल पहुँच जाए तो मुंह उलटी कर देगा, पेट जहाँ श्रीमद भागवत पहुंच जाए तो श्रीमुख वमन कर देगा।

पेट, जिसमे भूख है। पेट जिसे अन्न चाहिए।
और  महर्षि त्रिपुण्डधारी -भगवा- आवरणी, श्रीमद्भागवत के महाज्ञाता, आप कह रहे है कि आपके पास भूख को ही खा जाने का एक प्राचीन मंत्र है।
महाराज, इसाई तो कम से कम भूखे पेटों को खाना खिला कर भजन गवाते हैं लेकिन आप तो हिमालय की किसी अज्ञात कन्दरा के किसी निराहारी बाबा का हवाला देकर भूख को ही खा जाने की बात करते हैं।
महाराज, ईसाई षड्यंत्र कारी हैं और आप?
-बता दूँ?
"मक्कार।"

महाराज जी पेट, नही तोंद, आपकी तोंद केवल आपके शरीर से ही नही बंधी है। आपने तो अपनी तोंद अपने तम्बू को खड़ा करने वाले हर बांस पर टांग रखा है---जी हाँ मैं उन स्टील के चमचमाते बक्सो की बात कर रहा हूँ।
हर खम्भे, हर बाँस से बंधे उन स्टील के चमचमाते बक्सो की, जिस पर दान पात्र लिखा है।

महाराज, कम से कम षड्यंत्रकारी ईसाईयों की तरह पहले पेट की तो व्यवस्था कर देते फिर कथा बांचते। षड्यंत्रकारी ईसाई तो पेट की आग बुझाने के बाद सुसमाचार, गुड न्यूज बांचते हैं।

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