पिंड़ीया के कहनी।
परूवा के दिन सोहराई
की रात ह गाई दाढ़ लागेला
भइस पखेरेले
चेर मोरिनिया पिंडिया लावेले
लावे के दिन गईली हा
छोडवे के दिन अईली हा
चेरिया गईली हा रन में बन में
इन्हना के कठिया के
तले त रानी के मन मे खीस दिख भईलहा
चेरिया के पुतवा, बछवे खूंटवा
तुर तार देली हा
पिंडिया उसिनली हा
उपासे बईठली हा
तले चेरिया आइल हिया रन से बन से
देखतीया की मोर बेटा घूरा प लोटता पोटता
झार झुर के कोरा में उठा लेलिहा
कहतिया रानी हो रानी केवाड़ खोल
-कइसे में केवाड खोली
तोर त बेटवा बछवे खूंटवा, तुर तार दिहनी
पिंडिया उसीननी उपासे बईठनी
रेल आव टेल आव
-कांखे मोरा बेटा बा,माथे मोरा ओड़ा बा
(बेटवा के नाम सुन के सोहर के गोड़ प गिरली हा)
-चेरिया रे चेरिया कवन ते नेम कइलिस, कवन ते धरम कइलिस?
काहे तोर जियछ भईल,काहे मोर मराछ भइल?
-रानी हो रानी तू त राजा के रानी बाड़ू
पान-फूल कढलु, मुँह जूठीअवलू
हम त चेर चापट
अगिया के गईनी तहो कहानियां सुननी
पनिया के गईनी तहो कहानियां सुननी
एहि से हमार जियछ भइल बा
एहि से तहार मराछ भइल बा।
हरतो सोग ना परतो सोग
सोग पर घूर पुतवे कोर!
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