13.4 बिलियन वर्ष पहले बिगबैंग हुवा, ठीक है। चारो फंडामेंटल फोर्स एक एक करके अलग हुए, ठीक, चलिए कुछ नही से सब कुछ बना जैसा कि आज भौतिकीविद मानते हैं। क्वांटम वैक्यूम, पार्टिकल, एन्टी पार्टिकल, आनाहिलेशन, इनका एनर्जी में कन्वर्जन, प्रत्येक 1करोड़ एन्टी-पार्टिकल पर रहस्मयी तरीके से एक एक्स्ट्रा पार्टिकल का बन जाना, फंडामेंटल पार्टिकल्स, बोसॉन, डार्क मैटर, डार्क एनर्जी ------- सब ठीक लेकिन प्रश्न यह कि यह सब हुवा ही क्यों और फिर काल क्रम में ब्रह्मांड में चेतना विकसित क्यो हुई ? ऐसा नही कहा जा सकता कि हम ब्रह्मांड नही है, हम भी ब्रह्मांड के हिस्से ही है और ब्रह्मांड के बारे में जानने का प्रयास करते हैं। मतलब ब्रह्मांड के एक हिस्से को दूसरे हिस्से के बारे में जानने की आवश्यकता, उत्सुकता या ज्ञाता-ज्ञेय का द्वेत आदि यह सब हुवा ही क्यों?
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