प्रश्न है कि क्या बिग बैंग प्रारम्भ है और इस ब्रह्मांड का अंत सम्भव है?
प्रायः ब्रह्मांड क्यो का जवाब दिया जाता है कि ह्यूमैन मोटिव को ब्रह्मांड पर आरोपित नही किया जा सकता। ब्रह्मांड किसमे फैल रहा है का उत्तर होता है कि यह प्रश्न सार्थक नही है और यह ठीक वैसा ही प्रश्न है कि उत्तरी ध्रुव के उत्तर में क्या है। 【हॉकिंग】
कहा जाता है कि हम ब्रह्मांड को अंदर से जानते है और इन अंदर की कोटियों पर आधारित प्रश्न ब्रह्मांड पर लागू नही हो सकते। बिगनिग और एंड, अथ और इति ब्रह्मांड के अंदर की घटना तो निश्चित रूप से है। प्रारम्भ और समाप्ति तो निश्चित रूप से ब्रह्मांड के अंदर पाए जाते है लेकिन इसके उलट अथ और इति के अंदर ब्रह्मांड है यह हम निश्चितता के साथ कैसे कह सकते हैं? क्या यह रोजमर्रा की घटनाओ का इस वृहत पर आरोपण नही है?
क्या कोई बता सकता है कि "कब" "कैसे" "क्यों" कहाँ" में से कौन-कौन किस-किस सन्दर्भ में पूछना नॉनसेंस नही है और इसके निर्धारण का मानक क्या है?
बिग-बैंग हुवा है, बिग फ्रीज़, बिग रिप या बिग क्रंच भी हो सकता है लेकिन यह ब्रह्माण्ड का प्रारम्भ या खात्मा नही हो सकता। यह उस वृहत की एक प्रक्रिया का पूर्ण हो जाना मात्र लगता है।
प्रतीत होता है कि बिग बैंग से बिग क्रंच या बिग फ्रीज़, रिप तक की प्रक्रिया यदि ब्रह्मांड है तो यह सीमित है और कॉस्मोलॉजिस्ट का यह ब्रह्मांड भले ही देश-काल मे अनन्त हो लेकिन यह असीम नही है और #वह ससीम नही है। ये कॉस्मोलॉजिस्ट हमारी चेतना में आए ब्रह्मांड की एक एड होक व्याख्या कर रहे हैं।
कुछ ज्ञात ज्ञात हैं, कुछ ज्ञात अज्ञात हैं और कुछ अज्ञात अज्ञात है। हम उस अज्ञात अज्ञात तक पहुँच ही नही सकते।
क्वाण्टम भौतिकी के विकसित होने के साथ भौतिकी में प्रेक्षक या ऑब्जर्वर की भूमिका बढ़ती जा रही है। कहा तो यह भी जाने लगा है कि जिसे हम सत्यता कहते हैं वह ज्ञाता और ज्ञेय के मध्य अन्तःक्रिया में उभरता है और इस अंतः क्रिया के बाहर इस सत्यता का कोई अस्तित्व नही रहता।【व्हीलर】
इस विचार पर आधारित व्हीलर ने ब्रह्मांड में मौजूद फाइन ट्यूनिग की व्याख्या करने के लिए पार्टिसिपेटरी एंथ्रोपिक प्रिंसिपल दिया जिसके अनुसार वेव फंक्शन के ध्वस्त होने के लिए एक वास्तविक प्रेक्षक की आवश्यकता है। जॉन बैरो और फ्रैंक टिपलर कहते हैं की ब्रह्मांड अस्तित्व में तब आता है जब कोई प्रेक्षक ब्रह्मांड का प्रेक्षण कर रहा होता है। 【द एंथ्रोपिक कॉस्मोलॉजिकल प्रिंसिपल】
नील द ग्रास टायसन अपनी पुस्तक ओरिजिन्स में लिखते हैं कि प्रारम्भ में भौतिकी के नियम थे।
जीव विज्ञानी रूपर्ट शेल्ड्रेक कहते हैं कि हम एक ऐसी स्थिति में आ जाते हैं जहाँ भौतिकी के नियम की पूर्वमान्यता माइंड या मनस है। 【द साइंस डेलयूज़न】
यदि भौतिकी के नियम वास्तव में मनस की प्रागपेक्षा रखते हों तो फिर बिग-बैंग को हमारा मनस रच रहा है। ब्रह्मांड की शुरुआत और अंत का प्रत्यय हमारा मनस रच रहा है। ब्रह्मांड का आदि या अंत है हम नही कह सकते।
प्रायः ब्रह्मांड क्यो का जवाब दिया जाता है कि ह्यूमैन मोटिव को ब्रह्मांड पर आरोपित नही किया जा सकता। ब्रह्मांड किसमे फैल रहा है का उत्तर होता है कि यह प्रश्न सार्थक नही है और यह ठीक वैसा ही प्रश्न है कि उत्तरी ध्रुव के उत्तर में क्या है। 【हॉकिंग】
कहा जाता है कि हम ब्रह्मांड को अंदर से जानते है और इन अंदर की कोटियों पर आधारित प्रश्न ब्रह्मांड पर लागू नही हो सकते। बिगनिग और एंड, अथ और इति ब्रह्मांड के अंदर की घटना तो निश्चित रूप से है। प्रारम्भ और समाप्ति तो निश्चित रूप से ब्रह्मांड के अंदर पाए जाते है लेकिन इसके उलट अथ और इति के अंदर ब्रह्मांड है यह हम निश्चितता के साथ कैसे कह सकते हैं? क्या यह रोजमर्रा की घटनाओ का इस वृहत पर आरोपण नही है?
क्या कोई बता सकता है कि "कब" "कैसे" "क्यों" कहाँ" में से कौन-कौन किस-किस सन्दर्भ में पूछना नॉनसेंस नही है और इसके निर्धारण का मानक क्या है?
बिग-बैंग हुवा है, बिग फ्रीज़, बिग रिप या बिग क्रंच भी हो सकता है लेकिन यह ब्रह्माण्ड का प्रारम्भ या खात्मा नही हो सकता। यह उस वृहत की एक प्रक्रिया का पूर्ण हो जाना मात्र लगता है।
प्रतीत होता है कि बिग बैंग से बिग क्रंच या बिग फ्रीज़, रिप तक की प्रक्रिया यदि ब्रह्मांड है तो यह सीमित है और कॉस्मोलॉजिस्ट का यह ब्रह्मांड भले ही देश-काल मे अनन्त हो लेकिन यह असीम नही है और #वह ससीम नही है। ये कॉस्मोलॉजिस्ट हमारी चेतना में आए ब्रह्मांड की एक एड होक व्याख्या कर रहे हैं।
कुछ ज्ञात ज्ञात हैं, कुछ ज्ञात अज्ञात हैं और कुछ अज्ञात अज्ञात है। हम उस अज्ञात अज्ञात तक पहुँच ही नही सकते।
क्वाण्टम भौतिकी के विकसित होने के साथ भौतिकी में प्रेक्षक या ऑब्जर्वर की भूमिका बढ़ती जा रही है। कहा तो यह भी जाने लगा है कि जिसे हम सत्यता कहते हैं वह ज्ञाता और ज्ञेय के मध्य अन्तःक्रिया में उभरता है और इस अंतः क्रिया के बाहर इस सत्यता का कोई अस्तित्व नही रहता।【व्हीलर】
इस विचार पर आधारित व्हीलर ने ब्रह्मांड में मौजूद फाइन ट्यूनिग की व्याख्या करने के लिए पार्टिसिपेटरी एंथ्रोपिक प्रिंसिपल दिया जिसके अनुसार वेव फंक्शन के ध्वस्त होने के लिए एक वास्तविक प्रेक्षक की आवश्यकता है। जॉन बैरो और फ्रैंक टिपलर कहते हैं की ब्रह्मांड अस्तित्व में तब आता है जब कोई प्रेक्षक ब्रह्मांड का प्रेक्षण कर रहा होता है। 【द एंथ्रोपिक कॉस्मोलॉजिकल प्रिंसिपल】
नील द ग्रास टायसन अपनी पुस्तक ओरिजिन्स में लिखते हैं कि प्रारम्भ में भौतिकी के नियम थे।
जीव विज्ञानी रूपर्ट शेल्ड्रेक कहते हैं कि हम एक ऐसी स्थिति में आ जाते हैं जहाँ भौतिकी के नियम की पूर्वमान्यता माइंड या मनस है। 【द साइंस डेलयूज़न】
यदि भौतिकी के नियम वास्तव में मनस की प्रागपेक्षा रखते हों तो फिर बिग-बैंग को हमारा मनस रच रहा है। ब्रह्मांड की शुरुआत और अंत का प्रत्यय हमारा मनस रच रहा है। ब्रह्मांड का आदि या अंत है हम नही कह सकते।
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