Wednesday, December 4, 2019

स्ट्रांग एंथ्रोपिक प्रिंसिपल

ब्रह्मांड में स्पेश जो आपस मे ग्रैविटी के कारण नही जुड़ा है फैलता जा रहा है। आज हम जिस ब्रह्मांड को उसके छोर के साथ देखते हैं जिसे हम ऑब्जरवेबल यूनिवर्स कहते हैं जिसकी त्रिज्या 46 बिलियन प्रकाश वर्ष है वह भविष्य में नही भी दिखेगी। भविष्य में कुछ लोकल गैलेक्सीज़ मिल कर आपस मे सुपरक्लस्टर बना लेंगी और इनके बाहर सघन अंधकार और केवल अंधकार होगा●●● कितना बड़ा है ब्रह्मांड!
यह भी सम्भव है कि हमारा ब्रह्मांड अनगिनत ब्रह्मांडीय बुलबुलों में से किसी एक बुलबुले में अवस्थित हो●●●●ओह, कितना वृहद और विराट है यह!
इतने वृहद ब्रह्मांड में मैं और मेरा अस्तित्व क्या है? मैं कहाँ ठहरता हूँ इस असीम विराट के सामने?
बहुत ही तुच्छ न?
नही, ब्रह्मांड ने मुझे अस्तित्व दिया है। मैं नही भी हो सकता था। ब्रहांड ने उन उन लाखों शुक्राणुओं में से उस शुक्राणु को निषेचित होने का मौका दिया जिससे मैं जन्मा।
मैं ऐसे ही नही हो सकता! कुछ है जिसको मैं मिस कर रहा हूँ वरना ब्रह्मांड ने मुझे अस्तित्व ही क्यों दिया?
मैं तुच्छ नही हूँ! हो सकता है मेरा पैदा होना बिग-बैंग के समीकरणों में ही लिख दिया गया हो और यह बिग-बैंग की यह कई शर्तो में से एक शर्त हो।
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