Wednesday, December 4, 2019

नथिंग इज़ नथिंग

भौतिकीविद लॉरेंस क्रॉस लिखते हैं कि यह जगत अपने आप से उतपन्न क्यो नही हो सकता, हमे एक स्रष्टा की आवश्यकता क्यो पड़ती है? जब  धर्मशास्त्रियों यह कहते हैं कि ईश्वर ने शून्य(नथिंग) से इस जगत की रचना की और मैं पूछता हूँ कि इस नथिंग को थोड़ा और विस्तृत करें तो धर्मशास्त्री मौन हो जाते हैं।
लॉरेंस की एक पुस्तक है: यूनिवर्स फ्रॉम नथिंग, व्हाई देयर इज़ समथिंग रैदर दैन नथिंग। उसमे वह लिखते हैं कि ट्रू नथिंग कुछ होता ही नही। वैक्यूम नथिंग नही है वहाँ फील्ड्स मौजूद हैं। जिस नथिंग की बात धर्मज्ञ करते हैं वह नथिंग नही हो सकता क्योंकि वह कुछ है जिसमे समथिंग होने की सम्भाव्यता है जिसे एक वाह्य कारक आकार देता है। भौतिकी के समीकरण भी यह बताते हो कि नथिंग, ट्रू नथिंग नही है; इनमे कवांटम फलक्चुवेशन मौजूद हैं और यह नथिंग  अनस्टेबल है।

क्रॉस लिखते हैं कि मैं उस नथिंग की बात कर रहा हूँ जो प्लेटो और एक्वाइन्स का नथिंग है: निर्वात/ एम्प्टी स्पेस।
मैटर और रेडिएशन की अनुपस्थिति के बावजूद इस नथिंग का नॉन-ज़ीरो ऊर्जा अवस्था हो सकती है। जेनरल रिलेटिविटी कहती है कि यह लघु स्पेस एक्सपोनेंशियली इतना विस्तृत हो सकता है कि आगे चलकर इसमें हमारा सम्पूर्ण ब्रह्मांड समा जाय। ज्यो ज्यो हमारा ब्रह्मांड विस्तृत होता है इस तवीरत विस्तारण के समय वह हिस्सा जिसमें हमारा ब्रह्मांड है, वह सपाट होता जाता है बावजूद इसके की उसकी एनर्जी कंटेंट बढ़ रही है। यह सम्भव है क्योंकि इस प्रकार के एम्प्टी स्पेस में ऊर्जा से सम्बंधित गुरुत्वाकर्षण दाब नकारात्मक होता है। ज्यों ज्यो विस्तार होता है यह विस्तारण स्पेश में ऊर्जा डंप करता है न कि इसके उलट (पृष्ठ 204-5)


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