दो ब्लैक होल के आपस में मर्ज होने की घटना का अध्ययन किया गया। पहले ब्लैक होल का द्रव्यमान 36 सूर्यो के द्रव्यमान के बराबर था। दूसरे ब्लैकहोल का द्रव्यमान 29सूर्यो के लेकिन जब ये आपस मे मर्ज हो गए तो जो ब्लैक होल बना उसका द्र्व्यमान 36+29= 65 होने की जगह 62 सूर्यो के द्र्व्यमान के ही बराबर पाया गया।
3 सूर्य के द्र्व्यमान कहाँ गया?
तीन सूर्यो के द्र्व्यमान के बराबर का द्र्व्यमान ऊर्जा बन गई और ग्रेविटेशनल वेव के रूप में ब्रहांड में फैल गई।
स्पेश-टाइम के फैब्रिक में द्र्व्यमान कर्व बनाता है लेकिन यह स्पेश-टाईम के फैब्रिक/मीडियम में तरंग भी बनाता है जैसे पानी मे पत्थर डालिए और इससे पानी मे तरंग पैदा होगी।
ग्रेविटेशनल वेव को हमने डिटेक्ट किया। हम जिस प्रयोग और वेधशाला द्वारा ग्रेविटेशनल वेव्स को पकड़ते हैं उसे LIGO 【 Laser Interferometer Gravitational-Wave Observatory】 कहते हैं और एक ऐसा डिटेक्टर भारत मे भी है: LiGO INDIA.
3 सूर्य के द्र्व्यमान कहाँ गया?
तीन सूर्यो के द्र्व्यमान के बराबर का द्र्व्यमान ऊर्जा बन गई और ग्रेविटेशनल वेव के रूप में ब्रहांड में फैल गई।
स्पेश-टाइम के फैब्रिक में द्र्व्यमान कर्व बनाता है लेकिन यह स्पेश-टाईम के फैब्रिक/मीडियम में तरंग भी बनाता है जैसे पानी मे पत्थर डालिए और इससे पानी मे तरंग पैदा होगी।
ग्रेविटेशनल वेव को हमने डिटेक्ट किया। हम जिस प्रयोग और वेधशाला द्वारा ग्रेविटेशनल वेव्स को पकड़ते हैं उसे LIGO 【 Laser Interferometer Gravitational-Wave Observatory】 कहते हैं और एक ऐसा डिटेक्टर भारत मे भी है: LiGO INDIA.


सर, भारत में ये डिडेक्टर अभी बन ही रहा है पुणे के पास।
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