Wednesday, December 4, 2019

जगत, डेटा, ज्ञान और मूल्य

मनुष्य प्रदत्त पा पहले से बने बनाए जगत में नही रहता बल्कि वह अपने जगत का निर्माण स्वयम करता है। जगत विषयक तथ्य का मानव भले ही निर्माण न कर सके किन्तु वह मूल्यों का सृजन स्वयम करता है और इस पकार मानवीय जगत और जीवन मात्र व्यवस्थित तथ्यों का संजाल नही है बल्कि यह तथ्य-मूल्यों की एक समष्टि बन जाती है।
जगत विषयक कोई भी सूझ और समझ इस प्रकार मानवीय सन्दर्भ में मात्र जगत के तथ्यों का अक्यूमलेशन मात्र नही है।
जगत विषयक तथ्य को मात्रतात्मक तथा गुणात्मक रूप से और बेहतर जानने के लिए मानव ने डेटा प्राप्त करने के लिए विविध उपकरण यथा, टेलिस्कोप, माइक्रोस्कोप आदि बनाए हैं जो मानवीय ज्ञान इंद्रियों के विस्तार हैं। इन डेटा को सूचना और ज्ञान बनाने के लिए इन्हें सन्दर्भ और अर्थ एवम आशय देने के लिए मानव आज सुपर कम्प्यूटर ही नही बल्कि क्वाण्टम कम्प्यूटर की भी सहायता लेने को आमादा है। इन जटिल और अत्याधुनिक उपकरणों से  हमे एक बहुत ही उदात्त और जटिल ज्ञान मिलता है लेकिन इस उदात्त और जटिल ज्ञान को विवेक बनाने वाली मशीन का, उपकरण का अविष्कार हमने न तो आज तक किया है और न कर पाएंगे हालांकि  आज प्रचलित मन के कम्प्यूटेशनल मॉडल के अनुसार मन और मष्तिष्क में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का सम्बंध है और इस विषय से सम्बंधित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वीक वर्जन, स्ट्रॉन्ग वर्जन आदि पर विचारकों के मध्य विवाद है।
ध्यातव्य है कि महान भौतिकीविद से जब मन के बारे में प्रश्न किया गया तो उन्होंने मन को मष्तिष्क का सॉफ्टवेयर कहा। प्रसिद्ध दार्शनिक सर्ल ने मन विषयक इस पोजीशन का जमकर खंडन किया है।

थोड़ी देर के लिए हम मान लेते हैं कि मन विषयक उक्त मॉडल सही है और हमने एक एथिकल सुपर कम्प्यूटर भी बना लिया है और उस एथिकल सुपर कम्प्यूटर से हम नीतिशास्त्र और मूल्य मीमांसा सिख रहे हैं। इस स्थिति में क्या हम मानव रह जाएंगे?
■■■■
डेटा, सूचना, ज्ञान और विवेक में अंतर होता है। हमारी ज्ञाननेंद्रियों से होकर जो कुछ भी चेतन या अचेतन रूप से हमारे मन पर संस्कारित होता है वह डेटा है। चेतन मन इन संस्कारो की उपेक्षा भी कर सकता है और इनको आकार और सन्दर्भ भी दे सकता है। हमारा मन इन डेटा को आकार और सन्दर्भ देकर सूचना का निर्माण करता है। सूचना को आशय और अर्थ इसे ज्ञान बनाता है। सूझ के साथ, अंतरदृष्टि के साथ ज्ञान विवेक होता है।

No comments:

Post a Comment

डीहवार, चेरो और खरवार: एक भाषाई और ऐतिहासिक विश्लेषण

डीहवार, चेरो और खरवार: एक भाषाई और ऐतिहासिक विश्लेषण भूमिका: भारतीय समाज की विभिन्न जनजातियाँ न केवल अपने ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों में...