Saturday, December 21, 2019

वेद, गोमांस भक्षण और कुछ प्रश्न



प्रोफेसर डी एन झा की "द मिथ ऑफ़ हौली काऊ" पढ़ रहा हूँ। वेदों में गोभक्षण नहीं है के सारे दावे टूट रहे हैं। यधपि गोभक्षण के सारे दावे टूट रहे है तथापि एक हिन्दू के रूप में किसी भी प्रकार की कोई आत्मग्लानि नहीं है।
गोभक्षण के इतिहास से, गऊ माता की रक्षा हो और गोघ्न के  बीच,हिंदुओं का गऊ, गीता, गायत्री, गंगा और गुरु में विश्वाश पाखण्ड प्रमाणित नहीं होता।
यह ठीक उसी प्रकार पाखण्ड नही है,जिस प्रकार किसी विश्व सुंदरी की "सुंदरता" ताज पहनते समय, इस लिए पाखण्ड नही है क्योंकि उस वक़्त उसके फेफड़ो में बलगम, आंतो में मल और मूत्राशय में मूत्र मौजूद है ;
किसी दूसरी नारी को एक माँ द्वारा अपनी पुत्रवधु चुनना इसलिए पाखण्ड नही है कि किसी काल में "माताएँ अपने पुत्रों में से सबसे वलिष्ठ पुत्र का वरण कर उनके संग सम्भोग करती थीं" (वोल्गा से गंगा: महापंडित राहुल सांकृत्यायन)।

अब आप कहेंगे, "नो नो यु आर कमिटिंग द लॉजिकल फालेसी ऑफ़ अपीलिंग टू इमोशन" इसलिए कुछ जेनुइन प्रश्न पूछना चाहता हूँ।

■ क्या हज़ारो वृषभो की सामूहिक बलि का कोई आर्कियोलॉजिक्ल कॉरोबोरैशन मिलता है?
दो- चार- दस आर्कियोलॉजिक्ल साइट्स तो कम से कम ऐसी ज़रूर मिली होंगी जहाँ बलि वेदिका, बृषभों की अस्थियाँ, बलि के रिचुअल में उपयुक्त अन्य सामान प्राप्त हुए होंगे।

■वाद विवाद की परंपरा के इस देश में जहाँ हर कर्मकांड और दार्शनिक सम्प्रत्य पर वाद विवाद हुए है, मधुपर्क से पंचगव्य होने की स्थिति में पक्ष और विपक्ष तो अवश्य रहा होगा। खंडन मंडन का साहित्य तो अवश्य होगा। कृपया उस ग्रन्थ का नाम बताएं क्योंकि अचानक और चुपके से बौद्ध धर्म के प्रभाव में आकर भी यह परंपरा बन्द हो जाए यह बात अपाच्य है।

■वर्तमान ब्राह्मणों के किसी गोत्र, किसी प्रवर, किसी, शाखा, किसी पाद में यह परंपरा आज भी कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में तो अवश्य मौजूद होगी। कृपया उस शाखा, उस पाद, उस गोत्र को उदृत करें जिसने भौतिक रूप से नही तो अपनी लोककथाओं में ही गोबलि की परम्परा को आज भी जीवित रखा है।

■वेद में ही मौजूद कई ऐसे सूक्त है जो गोवध को तो छोड़िए, किसी भी पशु की हिंसा का विरोध करते है। आप उनमे और गोवध को पुष्ट करने वाले श्लोकों में किस प्रकार संगति बैठाते है?

चलिए हम परिपक्वता दिखाते हुए इस बात को भूल जाते है कि श्रीमति इंदिरा गांधी ने गौ रक्षकों पर गोलियां बरसाईं थी। चलिए हम यह भी भूल जाते है कि आपने हमे चिढ़ाने के लिए केरल में टीवी पर लाइव गाय काटकर बीफ पार्टी की। चलिए हम यह भी भूल जाते हैं कि आप हमरा माखौल उड़ाने के लिए जे एन यू में बीफ फेस्ट करते हैं लेकिन मित्र आपको भी यह याद रखना होगा की गऊ-गंगा-गीता-गायत्री-गुरु से हिंदुओं की आस्था जुडी है।
आप हमारी आस्था पर प्रहार करके भी उस भीड़ को जन्म देते है जो अख़लाक़ की पिट पिट कर हत्या कर देती है ।

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