एक स्त्री
निस्तेज, रक्तहीन,
चीथड़ों से ढकती अपने जिस्म।
विडम्बना!!!
सर पर पीत मुकुट:
सोना? रॉल गोल्ड!
तीन आंसूं रोती है-
तीन पुत्रों के लिए।
सर पर बैठा इण्डिया,
कोसता है,
मां जीन्स-टॉप नही पहनती,
पूछने पर बाप का नाम भी बताती है,
साली गंवार!!!
दूसरे को कपड़ा चाहिए,
:ताला खोल रे नौटँकी बुढ़िया!!!
तीसरा आंसू पोछना चाहता था,
देश की सड़कों को लाल खून से पाट कर,
तेनुघाट जेल में बंद है आजकल।
और,यह स्त्री हमारी भारत माँ है।
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