"पर वह अश्वत्थामा की तरह अमर किन्तु मणि विहीन लोग हैं", सामने बैठे उस व्यक्ति ने कहा जो अन्य लोगो को सम्बोधित कर रहा था।
यह अतीत के एक समय की नही बल्कि भविष्य के एक समय की बात है। तब के वैश्विक सरकार की नज़र में ये लोग आतंकवादी है और इसलिए इनको आज सबसे बचकर यह मीटिंग करनी पड़ रही है जिसमे आज कुछ नए रिकरयूट भी शामिल होंगे।
मनुष्य वैज्ञानिक रूप से बहुत-बहुत ही ज्यादा प्रगति कर चुका है। आज किसी की चेतना को डिजिटलाइज कर उसको बायोप्यूटर में फीड कर उसको प्रिजर्व कर देने की बात भी इनके लिए बहुत पुरानी है। अब तो मनुष्य हज़ार -डेढ़ हजार साल से मरता ही नही। मनुष्य अब जीन को पूरी तरह कंट्रोल करना सीख गया है। भोजन भी अब जीवित रहने के लिए कोई करता ही नही, जिव्हा का कार्य अब मात्र कुछ इलेक्ट्रोड्स जोड़ कर स्वाद लेने का है। अपनी प्रजाति को बढाने के लिए सेक्स करने पर रोक लगा दी गई है और ऐसी एक सरकारी एजेंसी है जो आपको स्टेराइल कर एक कार्ड इशु करती है जिसे रखना आपकी जिम्मेदारी है। हाँ आप मज़े के लिए चाहे जैसे सेक्स करें: रियल, वर्चुवल, कम्प्यूयर प्रोग्राम्ड...इसकी कोई मनाही नही है लेकिन यदि आप अपना स्टेरेलाइज़ेशन नही करवाते तो आप बायो-टेरोरिस्ट हैं और आपको सबसे दुखदाई तरीके से ही नही बल्कि आपके मस्तिष्क में पेन अमलीफिकेशन प्रोग्राम इम्प्लांट करके आपकी दर्द के अहसास को उस अनुपात में बढ़ा दिया जाता है जिस अनुपात का तब के मानक के अनुसार आपने अपराध किया है।
आज से एक लाख वर्ष पूर्व किसी ने यह कल्पना भी नही की थी कि भविष्य में स्वयम को जीवित रखने की प्रवृत्ति और अपनी प्रजाति को जीवित रखने की प्रवृत्ति के मध्य टकराहट होगी लेकिन पिछले पच्चीस हजार वर्षों में यह हुवा है और स्वयम को जीवित रखने वाली प्रवृत्ति जीत गई है।
पूरे विश्व में हालांकि कुछ लोग हैं जो उनके पूर्वजो की अवस्था मे लौट जाने को सही मानते हैं। उनके अनुसार अंततः जीत प्रजाति को जीवित रखने की प्रवृत्ति की होगी और उसके लिए वह संघर्षशील हैं।
सरकार की नज़र में ये बहुत ही खतरनाक आतंकवादी हैं, इनका सफाया ज़रूरी है।
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