Wednesday, December 4, 2019

फेमिनिज़्म फेमिनिज़्म

वह तोड़ती थी पत्थर
इलाहाबाद के पथ पर
यह वर्जनाओ को तोड़ती है
जे एन यू के कैम्पस में
उसके वेणी में पुरुष को लुभाने वाली सुगन्ध नही
उसकी वेणी में वह फटा हुवा कंडोम है
जो कल ही फटा
मर्दवाद से आज़ादी के साथ।
मर्द का दुर्गन्ध
बाकी के मर्दों के लिए
क्रांति अमर रहे!!

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