Saturday, February 29, 2020

आवारा विचार 【दर्शन】

दर्शन की एक परिभाषा बेकन ने भी दी है और दर्शन को विज्ञानों का संश्लेषण कहा है। एक दर्शनिक की मधुमक्खी से तुलना करते हुए वह दार्शनिक को वह मधुमक्खी कहते है जो विभिन्न विज्ञानों के पुष्पों से पराग चूसकर दर्शन रूपी मधु तैयार करता है। 
अब यदि आप वास्तव में एक ईमानदार दार्शनिक हैं तो आपको  एडवांस भौतिकी ही नही, एडवांस न्यूरोसाइंस की जानकारी रखनी भी  बाध्यता है। 
आप ब्रह्मांड की बात करते है और आपको रिलेटिविटी, क्वाण्टम, सिमिट्री, क्वार्क आदि के बारे में पता ही नही, आप चेतना की बात करते है और आपको सेंट्रल लैटरल थैलामस, एफ एम आर आई, सेरोटोनिन, डोपामिन आदि के बारे में कोई जानकारी ही नही, आप बुद्धि की बात करते है और आपको AI और पायथन के बारे में कोई जानकारी ही नही तो मामला कुछ ठीक नही!!

घ्यान रहे "ब्रह्म सत्यं-जगत मिथ्या" ही दर्शन नही है।

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