Thursday, February 6, 2020

काफ़िर



कहया मैं काफिर न कोई
सब पर रहमत राम की होई 

तब हरफ़ बिखरे पड़े थे। अलिफ़ कहीं, लाम कहीं और हे कहीं। किसी ने हरफों को जोड़ दिया, हरफो में उसको बांध दिया। माटी भी बिखरी पड़ी थी, पत्थर भी तब लावारिश थे। किसी दूसरे ने माटी में, पत्थर में उसको गढ़ दिया।

कौन मोमिन, कौन काफ़िर?

मुल्ला कहता बुतपरस्त काफ़िर।
वह इस हक़ को नही देख पाया कि
बुत, माटी से सिफ़ात  हैं
और वो सिफात, हरफो से गढ़ी मूरत।
हरफो में देखो तो माटी मिलेगी
पत्थर में देखो तो हरफ!!

अल अस्मा उल हुस्ना अल्लाह त'आला के 99 सिफ़ात हैं: अर रहीम, अल रहमान, अल मालिक, अल कुद्दुस-----------------------------------------

सिफ़ात हरफो की मूरत
मूरत सजर ओ गिल के सिफ़ात!!

सजर: पत्थर
गिल: मिट्टी

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