Thursday, February 13, 2020

साहेब का गणित (व्यंग)

साहेब का गणित (व्यंग)
------------------------------

बाहर कड़ाके की बारिश हो रही थी और उस क्षेत्र में कुछ ज्यादा ही वज्रपात होता है क्योंकि पहला जमीन के नीचे मिनरलस हैं और दूसरा टोपोग्राफी अनइवेन है, तभी साहेब का मोबाइल बजा....जी कौन?
--साहेब मेरी बकरी वज्रपात से मर गई.
--तो मैं क्या करूँ? मुझे बकरी जिंदा करना नही आता।
--नही साहब, सरकारी मुआवजा लेना था।
--ओह, कितना मुआवजा मिलता है? 
---साहेब तीन हज़ार रूपए।
--देखिए, फलाने जी आपकी बकरी मरी है तो आप आवेदन करिएगा और उसमे यहाँ का चपरासी पाँच सौ रुपया ले लेगा तो बचा ढाई हजार। आपकी बकरी  वज्रपात से मरी है कि नही इसकी जाँच करने कर्मचारी जाएगा और यह लिखने के लिए कि आपकी बकरी वज्रपात से ही मरी है एक हजार कम से कम ले लेगा तो बचा डेढ़ हजार। वो उस रिपोर्ट को किरानी को देगा जिस पर किरानी और बड़ा बाबू दस्तखत करेंगे और वहा आपका खर्च होगा एक हज़ार तो अब बचा पांच सौ रुपया।  फाईल आपकी जाएगी नाजिर के पास जो आपको चेक देगा जो चेक देने के एवज में लेगा पांच सौ रुपए तो आपके पास बच गया ज़ीरो। हो गया हिसाब बराबर। 
----जी साहेब
---------------●●●●●-------------

No comments:

Post a Comment

डीहवार, चेरो और खरवार: एक भाषाई और ऐतिहासिक विश्लेषण

डीहवार, चेरो और खरवार: एक भाषाई और ऐतिहासिक विश्लेषण भूमिका: भारतीय समाज की विभिन्न जनजातियाँ न केवल अपने ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों में...