Sunday, February 9, 2020

सन्निपात 【एक】



मनुष्य पशुओ की अपेक्षा चांस और रैंडमनेश के विकास के गुण के सबब एक बड़ा मस्तिष्क पा जाने की खुमारी से आज भी बाहर नही निकल पाया है। चांस और रैंडमनेश, क्योकि आप जैव विकास की प्रक्रिया को रिवाइंड करते हुए फिर वही से प्रारम्भ करिए जहाँ से सब प्रारम्भ हुवा और इस बात की कोई गारंटी नही की उत्परिवर्तन और प्राकृतिक चयन इस स्तर तक आते आते या बीच मे ही कहीं आपको वही स्पीशीज देगी जो इसके पूर्व रही है, और हमारे स्तर तक आते-आते शायद एक बहुत बड़े सर वाला कॉकरोच हो जो जीवन के इस प्रकृति के एवम अन्य प्रजातियों के साथ हो रहे संघर्ष में सबसे ज्यादा फिट हो। एक फोटोन पानी पर गिरता है और हम नही बता सकते कि वह फोटोन पानी से होकर गुजरेगा या परावर्तित हो जाएगा। एक प्रेक्षकीय चेतना के परिप्रेक्ष्य से जगत क्वाण्टम लेवल पर किसी उस नियतिवाद का पालन नही करता जिससे हम इस क्वाण्टम की दुनिया मे प्रवेश करने से पहले परिचित थे, जिसके अभ्यस्त थे और जगत के विषय मे हमने बड़े-बड़े दावे ठोक दिए थे; जैव विकास की घटना में उत्परिवर्तन या जेनेटिक म्यूटेशन एक क्वाण्टम इवेंट की तरह है--हम नही जानते कि कौन सा जीन उत्परिवर्तित होगा---कौन सी नई स्पीशीज सामने आएगी।
प्रश्न यह है कि जब हम अपने ही अस्तित्व के बारे में इतने अनिश्चित हैं तो फिर हम उन बड़े-बड़े दावों को कैसे कर बैठते हैं यथा: मुक्ति, निर्वाण, कैवल्य, ब्रह्म।
केवल एक घटना, इस विशाल जगत में एक बहुत ही इनसीगनिफिकेन्ट घटाना नही हुई होती और हम उन विशाल सर वाले कॉकरोचों की दुनिया मे बीमारी फैला रहे होते तथा उनके स्प्रे और हिट से छुपते फिर रहे होते।

No comments:

Post a Comment

डीहवार, चेरो और खरवार: एक भाषाई और ऐतिहासिक विश्लेषण

डीहवार, चेरो और खरवार: एक भाषाई और ऐतिहासिक विश्लेषण भूमिका: भारतीय समाज की विभिन्न जनजातियाँ न केवल अपने ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों में...