कविता, आधुनिक या शास्त्रीय, बड़ी विषयिनिष्ठ चीज है-पाठक के लिए भी और लेखक के लिए भी। कई बार लेखक की विषयनिष्ठता पाठक के वस्तुनिष्ठता से बड़ी भी होती है लेकिन पाठक इस बात से प्रायः अनावगत होता है और अपनी समझ की सीमाओं की समीक्षा किए बिना ही जल्दीबाजी में प्रतिक्रिया दे बैठता है।
खैर, लेखक तो तो इस बात की खुशी है कि पाठक ने कम से कम उसका लिखा पढ़ा क्योकि यह भी कम महत्वपूर्ण चीज नही है।
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