Thursday, February 6, 2020

अपना रिश्ता, दिल्ली की नौकरी



प्रिये हमारा सम्बन्ध
जैसे दिल्ली की कोई नौकरी
जब जब आँखों मे सपने नही होते
तुम्हारे देखता हूँ:
कम से कम यह तो बची रहे!
बदसूरत सा काम
पर होठो पर बनावटी मुस्कान
लिपा, पोती, झूठ
ऊपर से ठाट बाट नीचे मोकामा घाट।
हाँ जी, हाँ जी सर, हाँ डार्लिंग!
क्योकि हाँ जी की नौकरी
ना जी का खाली हाथ।
दिल्ली की चाकरी: अपना रिश्ता
ज़िंदगी साली,
तुम्हारे साथ साली ज़िंदगी!

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