जोहार जोहार जाहेर आयो। जोहार जोहार मारांग बुरु। जोहार जोहार लिटा गोसांई। जोहार सिरजोन बोंगा। पिलचु हाड़ाम पिलचु बुढ़ी जोतो जीवी जाति धोरोम अडी अडी सोनोत जोहार!
साल के वृक्षों के वनों में
निवास करने वाली जाहेर आयो को नमन है।
प्रसव धर्मिणी जिससे यह दृश्य प्रकृति निःसृत होती है उस जाहेर आयो को मेरा नमन है।
लिटा गोसाई के संग मिलकर हमारा पालन पोषण करनेवाली महामाई जाहेर आयो को मेरा नमन है।
जिससे धरती ऊर्वरा शक्ति धारण करती है उस जाहेर आयो को मेरा नमन है।
तुम ही भावनी हो, त तुम ही आदि शक्ति हो, हे जाहेर आयो तुम्हे नमन करता हूँ।
माँ मैंने तुम्हे उन साल के जंगलों में देख लिया है, उन पत्तो उन टहनियों उन फूलों में, इन बीजों में तुम्हे महसूस करता हूँ ।
बीजों के अंकुरित होने की शक्ति तुम ही तो हो। फूल के खिलने की शक्ति तुम ही तो हो। फल बनने की शक्ति तुम ही तो हो।
मूल में तुम, फूल में तुम।
बिज में, प्रकृति की हर चीज़ में तुम।
जेहरा थान में निवास करने वाली जाहेर आयो को मेरा नमन है।
जोहार जाहेर आयो, जोहार जाहेर आयो, जोहार जाहेर आयो।।।
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