Thursday, February 6, 2020

तुम्हारी संस्कृति

"पेट, जब भर न पाए तो मुफलिसी, दरिद्रता, गरीबी।
पेट जब भर जाए तो धर्म, संस्कृति की दुहाई।

हा-हा हा! हा-हा-हा!

पेट भर ठूंसने के बाद अर्धनिद्रा में बड़बड़ाना सा है तुम्हारी संस्कृति!

और अपनी संस्कृति का विरोधाभास तो देखो, यदि मैं नाखून बढ़ा लूं जो मुझे प्रकृति ने एकमात्र हथियार दिया है तो मैं असंस्कृत लेकिन तुम सुसंस्कृत हो क्योकि तुम्हारी मैनिकयुर्ड उंगलियां ट्रिगर को चूमती हैं।"

हा-हा हा! हा-हा-हा!

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