स्वामी नही
दास
महाराज नही
लघुजन
दास लघुजन
दर्शन का विद्यार्थी
(दृश्यते वस्तु यथात्मयम अनेन इति दर्शनम)
परमानन्द पांड़े बन गया:
राज करे शुद्र और
देश के बारे में सोचे ब्राह्मण?
जनेऊ की गाँठ
महामृत्युंजय।
न दास न देस
जाति!
दास लघुजन नही
जीवन पथिक नही
लोकतंत्र के तंत्र से जन्मा
मतदान पेटी पर
काँपती बुद्धि के गर्भ से
एक बाभन,
बाभन को मत देकर!
---------●●●●●--------
बढ़िया
ReplyDelete