Thursday, January 30, 2020

जय माँ शारदे


सरस्वती माता पर यह कविता आठवी में लिखा था जब जयशंकर प्रसाद की "हिमाद्रि तुंग श्रृंग से" कविता पढ़ी थी।
पता नही कितनी अशुद्धियाँ हैं:

प्रशस्थपथप्रदर्षिणी विवेक स्रोतस्विनी
सुहासिनी सुवासिनी भारती मधुरभाषिणी
विणाधारिणी गिरा शारदा अमृतवर्षिणी
अमर्त्यदात्री भाग्यविधात्री पददलित उत्कर्षिणी

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