Thursday, January 30, 2020

वसन्त


वसन्त पर यह कविता क्लास 9 में लिखा था।
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बिखेरते मदमस्त पवन मकरंद को,
कलियाँ बिखेरे नव-सुवास आनन्द से,
विहाग भी गान गाते झूम-झूम,
स्वागत करते पावन रम्य वसन्त का।

दिखाती नवश्रृंगार नवपल्लवों की लाली,
क्षण-क्षण है वसन्त का अहलादमय,
कण-कण युक्त वसन्त के सुवास से,
है प्रकृति आज कुछ अतुल्य सी।

वसन्त है सन्देश नवसंकल्प का,
प्रतिबिम्ब जिसके कौतूहल प्रकृति के,
कहती प्रकृति आओ मेरे संग-संग
खो जाओ नवजीवन के उल्लास में।

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