ओल्बर का पैराडॉक्स
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रात्रि का अंधकारमय होना भी इस बात की गवाही है कि ब्रह्मांड फैल रहा है और इसका जन्म अनन्त काल मे नही बल्कि सीमित समय सीमा में हुवा है। यदि ब्रह्मांड फैल नही रहा होता या इसका अस्तित्व अनन्त काल से होता तो रात्रि आकाश अंधकारमय होने के बजाय दृश्य प्रकाश से भरा होता।
एक जर्मन खगोलविद हेनरिक ओल्बर (1758-1840) ने एक पैराडॉक्स का उल्लेख किया। इस पैराडॉक्स को ओलवर्स पैराडॉक्स के नाम से जानते हैं। ओल्बर के काल मे ब्रह्मांड को अनन्त और गतिहीन माना जाता था; ध्यातव्य है कि 1922 के पहले हमारी मंदाकिनी आकाश गंगा को की सम्पूर्ण ब्रह्मांड माना जाता था।
ओल्बर ने कहा कि यदि ब्रह्मांड अनन्त और गतिहीन है तो फिर रात्रि आकाश को प्रकाश से भरा होना चाहिए। चूंकि रात्रि आकाश प्रकाश से भरा हुआ नही है अतः ब्रह्मांड विषयक यह मान्यताएं की वह अनन्त है तथा वह गतिहीन है, गलत हैं।
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