मल्टीवेवलेंथ यूनिवर्स
'बहुतरंगदैधर्यी ब्रह्मांड' :【एक】
-------------------------------------------------
ऊर्जा--!
तब जगत में केवल ऊर्जा थी।
ऊर्जा मैटर और एंटीमैटर में टूटती और पुनः ये जोड़े अनिहिलेट होकर प्रकाश बन जाते और ये क्रीड़ा चलती रहती थी। लेकिन ब्रह्मांड फैल रहा था और ठंढा भी हो रहा था और ऊर्जा अपने विविध रुपों में, विविध तरंगदैध्र्य और आवृत्ति में स्वयम को अभिव्यक्त कर रही थी।और फिर किसी अज्ञात कारण से मैटर-एंटीमैटर की सिमिट्री टूट गई :प्रत्येक एक अरब एंटीमैटर पार्टिकल पर एक एक्ट्रा मैटर पार्टिकल बन जाते और इस तरह अलख ब्रह्मांड के समग्र मैटर की उतपत्ति हुई -मौलिक कण बने--बोसॉन--फर्मियोन--परमाणु--अणु--ब्रह्मांडीय धूल-तारे--आकाशगंगा और हम।
हमारा आना हालांकि महज एक ब्रह्मांडीय दुर्घटना थी, एक संयोग, एक चान्स लेकिन यह एक अद्भुत घटना थी। एक छोटे से फल ने सम्पूर्ण वृक्ष पर विचार करना आरंभ कर दिया। ब्रह्मांड का एक अंग शेष अंगों को लेकर जिज्ञासु हो उठा।
इस बार मैटर-एंटीमैटर की जगह 'ज्ञाता-ज्ञेय' का युग्म अस्तित्व में आया।
----◇◆◆◆◆◇----
No comments:
Post a Comment