Saturday, September 12, 2020

समकालीन सैद्धांतिक भौतिकी की पाँच अनसुलझी समस्याएं

समकालीन सैद्धांतिक भौतिकी की पाँच अनसुलझी समस्याएं:

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■ क्वांटम ग्रेविटी की समस्या: समकालीन दो आंशिक सिद्धांतो, सापेक्षता और क्वांटम सिद्धान्त का एकीकरण कर ब्रह्मांड विषयक एक सिद्धान्त की खोज।

■ क्वांटम मैकेनिक्स के आधार में उपस्थित समस्याओं को सुलझाना। वास्तविकता यह है कि क्वांटम मैकेनिक्स का क्या अर्थ है यह किसी को सही रूप से नही मालूम।
एफ एस सी नॉर्थरोप "साइंस एंड फर्स्ट प्रिंसिपल" में लिखते हैं: वर्तमान युग मे तकनीकी वैज्ञानिकों के सामने ऐसे समीकरण हैं जिनकी व्यख्या वे स्वयम नही कर पाते तथा कुछ ऐसे सिद्धान्त भी है जिन्हें वे बिना दार्शनिक रंग चढ़ाए बोधगम्य नही बना पाते, परंतु इसे उनके कुछ सहयोगी स्वीकार नही करते। यदि स्पष्ट रूप से कहा जाय तो वैज्ञानिक अपनी खोजो को स्वयम ही सही रूप से नही समझते क्योकि प्रथम सिद्धान्त जो तकनीकी खोजो को बुद्धिगम्य बनाते है वह स्वयम एक अस्थिर स्थिति में हैं।"

■ सैद्धांतिक भौतिकी की तीसरी समस्या यह सुनिश्चित करना है कि विविध कणों और अन्तःक्रियाओ को समेट कर एक किया जा सकता है कि नही ताकि यह बताया जा सके कि ये सब एक मौलिक एन्टिटी की अभिव्यक्ति हैं या नही हैं।

■ चौथी समस्या इस बात की व्याख्या है कि स्टैंडर्ड मॉडल ऑफ पार्टिकल फ़िजिक्स के अंतर्गत मुक्त नियतांकों (फ्री कांस्टेंट्स) का मान प्रकृति में वही क्यो होते हैं।

■ पांचवी समस्या डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की व्याख्या है।

इन पाँच प्रश्नों को लिए समय रूपी यक्ष खड़ा है और इन प्रश्नों के उत्तर के बाद ही भौतिकी को यह यक्ष मुक्त करेगा और कुंती की प्यास बुझेगी!
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