Saturday, September 12, 2020

इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप

मुझे लगता है कि मैं समझ गया हूँ कि  लाईट माइक्रोस्कोप के लिमिटेशन को इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप कैसे दूर करता है। 

इंटर आदि में जो पढ़ना था पढ़ लिया किन्तु अब कल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का नाम सुना तो नाम सुनते ही मस्तिष्क ने प्रश्न किया कि प्रोटोन माइक्रोस्कोप क्यो नही? 
मस्तिष्क ने ही उत्तर दिया कि क्योकि प्रोटोन का साइज इलेक्ट्रॉन के साईज से बहुत बड़ा होता है। 
किसी छोटी चीज पर प्रोटोन बीम को टकराने से हो सकता है कि प्रोटोन को टकराने के लिए कम से कम वो चार छोटी चीज की ज़रूरत हो और हमे अधयन्न करना है उस अकेली छोटी चीज का उसके आईशोलेशन में अतः इलेक्ट्रॉन बीम ही ठीक रहेगा।

अब लाईट माइक्रोस्कोप का क्या लिमिटेशन था कि इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की ज़रूरत पड़ी?

विसिबल लाईट का वेवलेंथ यदि अध्ययन करने वाली चीज के साईज से बड़ी होगी तो लाईट तो सीधे आगे बढ़ जाएगी जबकि उस चीज को देखने के लिए लाईट को उस चीज से टकराकर हमारी आँखों तक पहुंचना होता है। 

इलेक्ट्रॉन के बीम के केस में इसकी वेवलेंथ छोटी होगी और इसे उस छोटी चीज से टकराकर एक सेंसेटिव स्क्रीन पर रिकार्ड किया जा सकता है जहां चीज की बनावट के हिसाब से सेंसेटिव स्क्रीन पर पैटर्न बनेगा और हमारी चीज, वह छोटी चीज हमे दिख जाएगी।

लेकिन फिर मस्तिष्क ने प्रश्न किया----क्या हम एक्स रे, गामा रे माइक्रोस्कोप नही बना सकते?

मुझे लगता है बना तो सकते हैं लेकिन पता नही वो छोटी चीज इन हाई एनर्जी रेज़ को सह भी पाएंगी की नही!
★★★

मैं बड़ा खुश की कुछ नया सोच रहा हूँ किन्तु गूगल किया और---यह पहले से ही सोचा जा चुका है।
खैर इस बात की खुशी है कि साइंटिफिकली सोचने लगा हूँ!


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