हमारा अनुभव इस बात की गवाही देता रहा है कि हमारे अनुभव में आया द्वैत सत्ता की गहराइयों में उतरते ही तिरोहित हो जाता है और हमे सत्ता के इस नए रूप को संज्ञा देने हेतु नवीन शब्द नवीन भाव की आवश्यकता होती है। सामान्य जीवन, सामान्य अनुभव का कण-तरंग का द्वैत मौलिक स्तर पर युग्मित हो जाता है। दिक और काल का विभाजन दिक्काल बन जाता है। पार्टिकल फिजिसिस्ट अपने दार्शनिक मोड में इसे सत्ता की वास्तविक सच्चाई कहने की जगह लेयर्स ऑफ रियलिटी कहना ज्यादा पसंद करते हैं। दोनों ही बाते सत्य हैं: इलरक्ट्रॉन पार्टिकल भी है और वेव भी और पार्टिकल-वेव भी, बस ये बाते रियलिटी या सत्ता के विविध स्तर की अभिव्यक्तियां है।
यह तो हुई एक बात! अब इस घटना पर की सत्ता की गहराईयों में द्वैत का अद्वैत हो जाना एक नए विचार को भी जन्म देता है, एक नए प्रश्न भी सामने खड़े कर देता है: कही वास्तव में ये अभिव्यक्तियां कण, तरंग, कण-तरंग और इलेक्टोन हमारे परिप्रेक्ष्य से हमारी चेतना द्वारा हमारे काम के लिए रचित करणमात्र ही तो नही हैं अर्थात "एन्टी रियलिस्ट थ्योरी ऑफ साइंस!"
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