संस्कृति का उत्कर्ष तो देखो
आदमी दाँत चियार के मर गया
तो संस्कृति वीरों ने कहा:
धन्य हमारी संस्कृति
यह मर के भी हँस रहा है
देखो दाँत चियारा है अभी भी!
नमस्ते!!
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डीहवार, चेरो और खरवार: एक भाषाई और ऐतिहासिक विश्लेषण भूमिका: भारतीय समाज की विभिन्न जनजातियाँ न केवल अपने ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों में...
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