Friday, April 17, 2020

फ्रैंक्सटिन कोरोना

समस्या यह है कि यदि कोरोना भारत मे फैला तो फिर बड़ी मुश्किल हो जाएगी क्योकि यहाँ न तो लोगो में अपेक्षित अनुशासन है, न ही उस स्तर की जागरूकता और जनसँख्या घनत्व का बहुत ज्यादा होना अलग से है: कोई कितना बचेगा!

ब्रह्मंडविज्ञान में एक पैराडॉक्स मौजूद है जिसे फर्मी पैराडॉक्स कहते हैं। इसके अनुसार ब्रह्मांडीय स्तर पर पृथ्वी जैसे जीवन, बल्कि इंटेलिजेंट जीवन पनपने की असंख्य जगहों के बावजूद हम आज तक कही और जीवन क्यों नही ढूंढ पाए हैं या अन्य इंटेलिजेंट जीवो ने हमे क्यो नही ढूंढ लिया है।

फर्मी पैराडॉक्स का एक हल यह भी दिया जाता है कि इंटेलिजेंस जीवन इस प्रकार प्रोग्राम्ड है कि अंततः वह अपना विनाश कर लेता है और पीछे कुछ नही बचता।

कोरोना का यह नया स्ट्रेन प्राकृतिक रूप से वायरसों में म्यूटेशन का परिणाम भी हो सकता है लेकिन यह भी दावे के साथ नही कहा जा सकता कि यह नया स्ट्रेन प्रयोगशाला में जेनेटिकली इंजीनियर्ड नही है। यदि यह वास्तव में जेनेटिकली  ईजीनियर्ड है तो हे इस धरा के एकमात्र बुद्धिधारी जीवो तुमने अपने लिए फ्रैंक्सटिन दानव तैयार कर लिया है, बधाई!

सम्भवतः प्रकृति ने तुम्हे बुद्धि देकर एक प्रयोग किया था लेकिन तुमने तो इसे बंदर के हाथ का उस्तुरा बना डाला!!

---------●●●●●--------

No comments:

Post a Comment

डीहवार, चेरो और खरवार: एक भाषाई और ऐतिहासिक विश्लेषण

डीहवार, चेरो और खरवार: एक भाषाई और ऐतिहासिक विश्लेषण भूमिका: भारतीय समाज की विभिन्न जनजातियाँ न केवल अपने ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों में...