Friday, April 17, 2020

युद्ध कैसे जीते जाते है?

मेरी प्यारी बहना सह मित्र सह जूनियर ने लिखा कि युद्ध आध्यत्म से जीते जाते हैं।

बहना काश की युद्ध आध्यत्म से जीते जाते! 
युद्ध दरअसल हथियार, अनुशाशन और रणनीति से जीते जाते हैं। कभी कभार लक, चान्स, देऊस एक्स मेकिना हो सकता है जो युद्ध मे अप्रत्याशित परिणाम ला दे लेकिन यह न के बराबर होता है। 

बीसे बिसा नौ पैतीसा झका झुमरिया डेढ़ सौ पर विश्वास हमे पराजित ही करता है।
 
पता नही सच या झूठ किन्तु जब गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर चढ़ाई की तो ब्राह्मण देवता कमण्डलु से जल छिड़क रहे थे। उन्हें यकीन था कि सोमनाथ उनकी और अपनी रक्षा कर लेंगे किन्तु क्या हुवा?
हम पराजित हो गए! 
अध्यात्म ठीक है, यह अपने आप से जीतने के लिए अवश्य ज़रूरी होगा किंतु युद्ध मे लड़ाई स्वयम से नही बल्कि शत्रु से होती है और इस बार का शत्रु तो साक्षात रक्तबीज है। हर बार माता काली स्वयम इस रक्तबीज का नाश करने अपने खप्पर लेकर क्यो आएंगी भला? 
और कैसे पता कि यह रक्तबीज ही है, यह  उनकी  लपलपाती जिव्हा भी हो सकती है?
यदि ऐसा भी है तब भी डॉक्टर, प्रशाषन, ड्राइवर, सफाईकर्मी आदि कल्याणकारी शिव बनकर माई की राह में  लेटने की कोशिश कर तो रहे हैं। शायद माई का ह्रदय द्रवित हो जाय!

ये क्या मैं तो भटक गया...!
हाँ, तो लड़ाई में अध्यात्म प्राथमिक नही होता बल्कि हथियार और रणनीति प्राथमिक होते हैं। 
बहना देखो न, चीन ने, ताईवान ने, दक्षिण कोरिया ने और अपने यहां केरल ने इनके बदौलत कितना अच्छा इस महामारी पर नियंत्रण कर लिया है।

बहना हमारे यहाँ, जहां मेरी ड्यूटी है अभी कुछ दिन पहले जगत को बचाने के लिए अयोधया से कुछ ज्ञानी आध्यात्मिक पुरूष आए थे लेकिन महामारी फैली, लौकडाउन हुवा और वो बेचारे वापस अयोध्या नही जा पाए और यहीं फंस गए।

अब हम उनको बचा रहे हैं।

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