बनमानुषों ने कुछ खोजा ठीक है लेकिन, आज की पीढ़ी के लोग उन बनमानुषों द्वारा उनके डर, स्वप्न, आशा, निराशा, पलायन, संघर्ष में ढूंढे गए उस कुछ के लिए अपने अंदर के मानुष की हत्या कर देते हैं, यह कुछ समझ मे नही आता; तब उन बनमानुषो द्वारा अपने अंदर के मानुष की हत्या करनी उनकी मजबूरी थी लेकिन आज का मानुष अपने अंदर के मानुष को मारे ये क्या बात हुई!
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