लाल बड़बोले
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वह चीथड़ों में लिपटी है
कोई अंग ढका नही
उसके होठो पर
चरक का दाग है
दाग को छुपाने के लिए
उसके पास लाली है
लाली, लाली, ओठलाली,
हैड्रॉक्सिक्लोरोक्विन!
यह ओठलाली
जगतसुंदरी बनने के लिए
अपर्याप्त है
जगत सुंदरी को भर पेट
खाना चाहिए, साफ पानी चाहिए
शौचालय चाहिए शौचने के लिए
उसके जान की कीमत हो
और मंदिर की ज़रूरत तो है ही
जिसके आगे वो चीथड़ों में लिपटी
भीख मांगेगी।
क्या जानते हो,
ओठलाली वाली
अपनी दवाई ट्रायल के लिए भी
वही भेजती है
ताकि वह कम से कम
लाली से दाग ढकते हुए भी
जिंदा रह सके
चीथड़ों और छाड़न में लिपटी ही सही?
और लालीवाली के लालो बड़बोले
तुम और मैं
केवल चूहे है
बिलायती चूहे
उनके लिए,
उनकी प्रयोगशाला के चूहे!
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