महेनदर बो (महेंद्र की औरत--महेंद्र की वधु---महेनदर बो) को नाग ने डँस लिया--विरह के नाग ने नही असली वाले नाग ने। उनको लेकर लोग सामुदायिक चिकित्सा केंद्र भागे--वहां न डाक साब, न ए एन एम--रात थी और महेनदर बो को राते में मैदान लगा था और मैदाने में नाग ने डँस लिया--अब डाक साब तो सुबह आते लेकिन उनके पहले ही यमदूत आए और महेनदर बो का शरीर-कपड़ा-टिकली-बिंदी उसी बेड पर छोड़ के बाकी चीज अपने साथ ले गए---चलs ढेर भईल!!
सुबह जनता ने किया बवाल---हेल्थ विभाग ये--हेल्थ विभाग वो---मुआवजा दो---सस्पेंड करो----इत्यादि।
परशाषन भी पहुंचा और साहब ने कहा ठीक है सब होगा पहिले पोस्टमार्टम ऑस्टमार्टम तो करवा लेने दीजिए।
पोस्टमार्टम की रिपोर्ट ऐसी बनाई गई कि उसमें आया--- महेनदर बो सामुदायिक केंद्र लाने के पहले ही मर चुकी थी----उधर महेनदर बो को अस्पताल ले जाने वाले और उनके मरने तक साथ रहने वाले भौचचक---साला मरा आदमी भी जिंदा टाइप करता है----! करता ही होगा----डाक साब लोग पढ़े है तब न डाक साब बने हैं---!!----उ लोग जिंदा आ मुर्दा का भेद जादा बुझते हैं---!!!!!
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